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Hot Aunty Ki chudai Uncle Ke Samne

प्रेषक : हर्ष पाटिल …

हैल्लो दोस्तों, में हर्ष पाटिल आज बहुत दिनों के बाद आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपनी एक नयी सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जो हाल ही में मेरे साथ घटीत हुई है, लेकिन कहानी को शुरू करने से पहले में जो नये पाठक है, उनके लिए अपना परिचय दे देता हूँ। दोस्तों मेरा नाम हर्ष है और में मुंबई में रहता हूँ, मेरी उम्र 24 साल है और में दिखने में एकदम ठीकठाक हूँ और आप लोगों की तरह में भी पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ, मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है। मैंने अब बहुत सारी सेक्सी कहानियाँ पढ़ी है और अपनी घटना को लिखकर आप लोगों तक भेजा भी है और आज में अपनी एक ऐसी ही जोश भरी घटना बताने जा रहा हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि इसको पढ़कर आप लोगों को बहुत मज़ा आएगा।

दोस्तों एक दिन में शाम को अपने ऑफिस से अपने घर के लिए बस से निकला और वो सभी के ऑफिस छूटने का वक़्त था। फिर मैंने देखा कि उस समय उस बस में भी बहुत भीड़ थी और मेरे आगे की तरफ एक आंटी खड़ी हुई थी, वो दिखने में अच्छी थी और उनकी उम्र कोई 42 साल के आसपास की होगी, लेकिन मैंने पहले इतना गौर नहीं किया था। अब में उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया था और बस में ज़्यादा भीड़ होने की वजह से ना चाहते हुए भी मेरा हाथ बार बार उनके हाथों को छू रहा था और उनके गोरे हाथों के मुलायम स्पर्श से मुझे अब कुछ कुछ होने लगा था। फिर मैंने एक बार उन्हें अब गौर से देखा, उनकी हाईट कुछ 5.2 इंच थी और उनका गोरा बदन, बूब्स भी दिखने में एकदम ठीकठाक थे, मतलब 34 के होंगे और उनकी गांड थोड़ी सी बाहर निकली हुई थी। अब मेरे मन में भी उनके बारे में लगाव शुरू हो गया था और अब में भी जानबूझ कर बार बार अपना हाथ उनसे छू रहा था, लेकिन वो भी मुझसे कुछ भी नहीं बोल रही थी और अब में थोड़ी हिम्मत करके धीरे धीरे उनकी कमर पर अपनी उंगली को घुमा रहा था, लेकिन वो फिर भी मुझसे कुछ नहीं कह रही थी। फिर वो तो बस अपने आगे वाले आदमी से बात कर रही थी और मुझे पहले लगा कि वो कोई और है, थोड़ी देर बाद बस में अब बहुत भीड़ बढ़ गई और फिर अब में बिल्कुल बिंदास होकर धीरे धीरे उनकी गांड पर हाथ फेर रहा था और सिर्फ़ एक बार उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन फिर भी कुछ भी नहीं कहा।

फिर वो जिस जगह पर खड़ी हुई थी, थोड़ी देर बाद वहां की सवारी उतर जाने से वो सीट खाली हो गयी और वो तुरंत उस जगह पर बैठ गई। अब में बार बार उन्हें छूने का कोई ना कोई मौका ढूँढ रहा था और मेरी इस हरकत पर उस आदमी ने भी गौर किया, अब वो भी मुझे लगातार घूर रहा था और हल्की हल्की स्माईल दे रहा था, जिसकी वजह से मुझे अब थोड़ा सा डर भी लग रहा था। उसके थोड़ी देर बाद मेरा भी स्टॉप आ गया और में अब उतरने लगा था, तभी मेरे पीछे वो आंटी भी आ गई और वो अंकल भी उनके पीछे पीछे थे और फिर में बस से नीचे उतरकर स्टॉप पर रुक गया, यह देखने के लिए कि वो लोग कहाँ जाते है और थोड़ी देर बाद वो दोनों बात करते करते आगे चले गये, तब मुझे एहसास हो गया कि वो उनके पति ही थे। फिर में भी उन दोनों के पीछे पीछे जाने लगा और फिर थोड़ी देर चलने के बाद पता नहीं कैसे अंकल एकदम से अचानक से नीचे गिर गये और अब में उनके पीछे था, इसलिए में उनको संभालने के लिए भागकर उनके पास गया और फिर मैंने उनसे पूछा।

में : क्या हुआ अंकल आपको कहीं चोट तो नहीं आई?

अंकल : अरे नहीं नहीं बेटा, पता नहीं मेरा पैर एकदम से कैसे फिसल गया और उस वजह से में गिर गया, लेकिन अब मुझे मोच आ गई है, आह्ह्ह्हह्ह मुझे अब बहुत दर्द हो रहा है उफफ्फ्फ्फ़।

में : हाँ मुझे वो सब नजर आ रहा है।

फिर वो धीरे धीरे उठकर खड़े हुए और चलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनसे चला भी नहीं जा रहा था और तभी एक साईड से मैंने उनको सहारा दे दिया और फिर वो धीरे धीरे चलने लगे और तभी आंटी ने मुझसे कहा।

आंटी : चलो अब हम सीधे घर ही चलते है।

में : हाँ अंकल यही बिल्कुल ठीक रहेगा, अब आप घर पर जाकर थोड़ा अपने पैर की मलम पट्टी करो, तब यह थोड़ा ठीक हो जाएगा।

फिर मैंने उनसे इतनी बात कहते हुए अपनी बात को खत्म करके एक ऑटो वाले को आवाज देकर रुकवा लिया और फिर उन दोनों को मैंने उस ऑटो में बैठा दिया, लेकिन तभी वो अंकल मुझसे कहने लगे कि प्लीज तुम भी चलो ना हमारे साथ मुझे अपना सहारा देकर मेरे घर तक छोड़ देना। फिर मैंने भी कुछ देर मन ही मन सोचा कि चलो इसी बहाने से मुझे आंटी के ज्यादा करीब रहने का मौका भी मिल जाएगा और में भी झट से उस ऑटो में बैठ गया। अब ऑटो में सबसे पहले में बैठा बीच में आंटी और फिर अंकल बैठे हुए थे और में भी जानबूझ कर आंटी से थोड़ा ज्यादा चिपक चिपककर बैठा और आंटी भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी। फिर हम लोग कुछ ही देर में उनके घर पर पहुँच गये और तब मैंने देखा कि वो दूसरी मंजिल पर रहते थे। फिर में और आंटी अंकल को अपने कंधे का सहारा देकर उनके घर तक लेकर चले आए और वहां पर पहुंचते ही उन्होंने मुझसे कहा।

आंटी : चलो अब अंदर बैठो बेटा, में तुम्हारे लिए अभी चाय बनाकर लाती हूँ।

में : अरे आंटी नहीं रहने दो, में अब अपने घर के लिए निकलता हूँ और में फिर कभी आ जाऊंगा, अभी तो आप अंकल जी को थोड़ा मालिश कर दो, उनका पैर ठीक हो जाएगा, शायद उनको बहुत दर्द हो रहा होगा।

अंकल : अरे बेटा तुम बैठो ना थोड़ी देर चाय पीकर चले जाना, मेरा पैर ठीक हो जाएगा।

फिर उसके बाद में बैठ गया और आंटी अंदर किचन में हमारे लिए चाय बनाने चली गई। अब में और अंकल बातें करने लगे थे और अब मुझे थोड़ी प्यास लगी थी, इसलिए मैंने वहां पर एक जग रखा हुआ देखा तो मैंने उसे पीने के लिए उठा लिया, लेकिन फिर देखा कि उसमें पानी नहीं था, तब अंकल ने मुझसे कहा।

अंकल : तुम अंदर किचन में चले जाओ, वहां पर तुम्हारी आंटी होगी और वो तुम्हें पानी दे देगी, जाओ ना।

अब में भी वहां से उनके कहने पर तुरंत उठा और उनके किचन में चला गया और वहां पर जाकर मैंने देखा कि उनकी किचन थोड़ी छोटी सी थी और जब में अंदर गया, तब आंटी चाय बना रही थी और उनकी पीठ मेरी तरफ थी, में धीरे से उनके पीछे गया और मैंने उनके बालों की खुशबू को एक पल के लिए सूंघ लिया और तभी मेरा लंड खड़ा हो गया था और आंटी की गांड को छू गया और तभी मैंने आंटी से कहा।

में : आंटी मुझे पीने के लिए थोड़ा पानी चाहिए था।

अब आंटी ने बस अपनी गर्दन घुमाई और मुझसे उन्होंने फ्रीज से लेने के लिए बोल दिया तो मैंने भी बिना अपने लंड को हिलाए वैसे ही हाथ को आगे की तरफ बढ़ाकर फ्रीज से एक बोतल को बाहर निकाल लिया और अब में पानी पीने लगा था। आंटी अपने मुहं को आगे की तरफ करके मंद मंद मुस्कुरा रही थी, क्योंकि मेरा तना हुआ लंड अब उनकी गांड को धीरे धीरे चूम रहा था। अब मेरा लंड आंटी की गांड की दरार में बिल्कुल फिट हो गया था और मैंने धीरे से उसको आगे की तरफ धक्का दे दिया और मेरी इस हरकत पर आंटी ने भी गौर किया, लेकिन उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा, लेकिन तभी बाहर से अंकल की आवाज़ आ गई।

अंकल : अरे सरला ज़रा हर्ष के हाथों से मेरे लिए भी पानी भेज देना।

आंटी : जी हाँ, अभी भेजती हूँ।

में अभी भी आंटी के पीछे खड़ा हुआ था। फिर आंटी ने पलटकर मुझसे बहुत प्यार से कहा।

आंटी : जाओ बेटा तुम्हारे अंकल को प्यास लगी है, तुम उन्हें यह पानी दे दो और में चाय लेकर अभी आती हूँ।

फिर में भी उनके कहने पर पानी का बोतल लेकर बाहर आ गया और अंकल के साथ बैठ गया और फिर आंटी हमारे लिए चाय लेकर आ गई और हम लोगों एक साथ बैठकर चाय पीने लगे थे और फिर उन्होंने मुझसे मेरे घर वालों के बारे में पूछा और हमारे बीच थोड़ी इधर उधर की बातें भी हुई और में कुछ देर बाद अपने घर के लिए निकलने लगा। फिर में उसके बाद उठकर जाने लगा और आंटी मुझे दरवाजे तक छोड़ने बाहर आई। तभी मैंने थोड़ी हिम्मत करके आंटी का हाथ अपने हाथों में लेकर उनसे कहा।

में : आंटी में बिल्कुल सच कह रहा हूँ, में आपको बहुत पसंद करता हूँ, आप बहुत सुंदर हो।

फिर इतना कहकर मैंने तुरंत उनका हाथ चूम लिया, आंटी भी मेरी यह बात सुनकर शरमा गयी और अब उन्होंने हंसकर अपनी गर्दन को नीचे करके मुझसे कहा।

आंटी : चल तू मुझसे मजाक करता है, में कहाँ इतनी सुंदर हूँ।

दोस्तों में अब उनके और भी करीब आ गया और मैंने उनकी आँखों में आँखे डालकर कहा।

में : नहीं में बिल्कुल सच कह रहा हूँ कि आप बहुत सुंदर हो।

दोस्तों मैंने अपना एक हाथ उनके पीछे ले जाकर उनके कुल्हे के ऊपर रख दिया और अब में उनको अपनी तरफ खींचकर तुरंत उन्हें किस करने लगा। पहले आंटी ने मुझे दिखाने के लिए थोड़ा सा नाटक किया और फिर वो भी मेरा साथ देने लगी, करीब पांच मिनट के किस के बाद मैंने आंटी को छोड़ दिया, अब आंटी मेरी तरफ धीरे से मुस्कुराई और में उनको बाय बोलकर चला गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

दोस्तों फिर दो दिन के बाद में अंकल को सुबह सुबह देखने उनके हालचाल पूछने के लिए उनके घर पर गया था कि उनका पैर कैसा है? दोस्तों यह तो सिर्फ़ एक बहाना था, में असल में वहां पर आंटी से मिलने गया था और जब में वहां पर गया तो अंकल ने दरवाजा खोला।

अंकल : अरे हर्ष बेटा तुम, आओ आओ अंदर आओ।

में : हाँ अंकल अब कैसा है आपका पैर का दर्द?

फिर में और अंकल सोफे पर बैठकर बातें करने लगे। फिर मैंने उनसे पूछा कि आंटी कहाँ है? तब अंकल मुझसे बोले कि वो अभी अभी नहाने गयी है, तुम तो बेठो वो अभी कुछ देर में आती ही होगी। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है और फिर हम लोग इधर उधर की बातें कर रहे थे तो अंकल मुझसे बोले।

अंकल : तुम बैठो में तुम्हारे लिए पानी लेकर अभी आता हूँ।

में : अरे नहीं नहीं अंकल में खुद ले लूँगा, मेरे लिए आप मत तकलीफ़ उठाओ।

दोस्तों उनसे यह बात कहकर में उठकर किचन की तरफ जाने लगा। तभी मैंने देखा कि आंटी बाथरूम से बाहर निकली, वो उस समय सिर्फ़ टावल लपेटकर सीधा उनके बेडरूम में घुस गयी और यह मैंने देख लिया, अंकल अभी भी टी.वी. देख रहे थे। फिर में वहां से उठकर सीधा उनके बेडरूम की तरफ चला गया और मैंने देखा कि वो दरवाजा पहले से ही थोड़ा सा खुला हुआ था और आंटी पूरी नंगी होकर अपने बालों को साफ कर रही थी और उनकी पीठ दरवाजे की तरफ थी। अब में धीरे से उनकी तरफ चला गया और मैंने धीरे से आंटी को पीछे से हाथ डालकर पकड़ लिया और अब में उनकी गोरी गर्दन को चूमने लगा था और आंटी भी अपनी आँखे बंद करके मुझसे बोलने लगी।

आंटी : ओह्ह्ह्ह, आज यह क्या हो गया है तुम्हें जो इतने दिनों बाद अपनी बीवी पर इतना प्यार आ रहा है?

दोस्तों में उनके मुहं से वो बात सुनकर थोड़ा चकित हो गया था, क्योंकि आंटी को लग रहा था यह सब काम उनके साथ अंकल कर रहे है और फिर मैंने भी मन ही मन सोचा कि चलो आज थोड़ा इसी बात का फ़ायदा उठाया जाए और अब में धीरे धीरे आंटी के बूब्स को भी दबा रहा था और उनकी गर्दन को भी चूम रहा था, आंटी अब गरम होकर जोश में आकर धीरे धीरे मोन कर रही थी।

आंटी : आअहह्ह्ह्ह उहहह्ह्ह्ह तुम्हें यह क्या हो गया है?

अब मेरा हाथ आंटी के पूरे बदन पर घूम रहा था, में आप सभी को क्या बताऊँ कि सच में मुझे कितना मज़ा आ रहा था? मैंने आंटी की पूरी पीठ को चाट चाटकर गीली कर डाली थी और अब आंटी भी मेरे लंड को पकड़ने के लिए अपना एक हाथ पीछे कर रही थी, लेकिन तभी मैंने उनको सीधा किया और तब भी उनकी आँखे बंद थी और मैंने उनके होंठो पर अपने होंठ रखकर में उन्हें चूसने लगा था, उम्माआ आआहह्ह्ह्ह मुझे अब थोड़ा डर भी लग रहा था, क्योंकि अंकल कभी भी अंदर आ सकते थे और फिर आंटी ने आँखे खोली और देखा तो उनके सामने में था। दोस्तों में सच कहूँ तो उस समय आंटी का वो एकदम लाल पसीने से भीगा हुआ चेहरा देखने लायक था, क्योंकि वो मुझे अपने बदन से लपटे हुए देखकर बहुत हैरान थी और तब उन्होंने मुझसे कहा।

आंटी : हर्ष तुम?

फिर मैंने हंसकर उनको एक चुम्मी ले ली और में वहां से तुरंत बाहर आ गया और अब में बहुत मज़े से अंकल के साथ बैठकर टी.वी. देख रहा था।

अंकल : अरे तुमने इतनी देर कैसे लगा दी?

में : हाँ वो में थोड़ी देर आंटी से बात कर रहा था।

फिर आंटी कुछ देर बाद वहां पर हम सभी के लिए चाय लेकर आ गई, उन्होंने उस समय सिर्फ़ एक मेक्सी पहनी हुई थी और उसके अंदर कुछ भी नहीं पहना था, यह मुझे साफ साफ दिख रहा था और फिर आंटी आकर सीधा मेरे और अंकल के बीच में बैठ गयी।

अंकल : क्या बात है आज तुम इतनी देर तक नहाई, क्यों तुमने बहुत देर लगा दी?

आंटी : अरे कुछ नहीं बस ऐसे ही समय लग गया।

अंकल : वैसे आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो।

फिर उन्होंने थोड़ा आगे बढ़कर आंटी के गाल पर मेरे सामने ही उन्हें एक किस कर दिया।

आंटी : क्या आप भी हर्ष के सामने ही चालू हो गये?

अंकल : अरे तो क्या हुआ उससे वो भी अब बड़ा हो गया और पूछ लो कि आज तुम कैसी लग रही हो, क्यों हर्ष?

में : हाँ आंटी, अंकल बिल्कुल सच कह रहे है, आज आप बहुत सुंदर लग रही हो।

आंटी : ऊहह तुम्हें बहुत बहुत धन्यवाद मुझे लगा कि कहीं तुम भी अंकल की तरह मुझे चूमोगे।

फिर आंटी हंसने लगी, अब में थोड़ा सा भ्रमीत हो गया और अब मैंने मन ही मन सोचा कि चलो एक बार हिम्मत करके देखते है।

में : अच्छा यह बात है तो यह लो महहाअ।

दोस्तों मैंने आंटी के गाल पर किस किया और यह देखकर अंकल हंसने लगे और कहने लगे।

अंकल : देखा मैंने कहा था ना कि तुम आज बहुत सुंदर लग रही हो, क्यों हर्ष?

में : हाँ अंकल सच में आंटी आज बहुत सुंदर लग रही है।

फिर यह कहने के बाद अंकल को भी जोश आ गया और वो आंटी के कंधे पर रखकर सीधा उनके होंठो को चूमने लगे। पहले तो आंटी ने थोड़ा सा नाटक किया, शायद उस समय में वहां पर था इसलिए, लेकिन फिर मैंने देखा कि वो भी अब अंकल का साथ दे रही थी। वाह दोस्तों सच में क्या सीन था, मेरा तो यह सब देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो गया था, लेकिन में चुपचाप सब कुछ देख रहा था। फिर कुछ पांच मिनट बाद वो दोनों अलग हुए और मेरी तरफ देखने लगे।

अंकल : क्यों हर्ष कैसा लगा?

में : वाह एकदम मस्त था अंकल मज़ा आ गया।

अंकल : अरे अभी कहाँ अभी तो और भी मज़े लेना बाकी है।

में : क्या मतलब में आपकी बातों का मतलब नहीं समझा?

फिर अंकल वहां से उठकर मेरे बाजू में आकर बैठ गये और उन दोनों के बीच में अब भी में बैठा हुआ था।

अंकल : हर्ष हुन्न्न्न मुझे सब पता है, तुमने जब से आंटी को देखा है, तब से तुम उसे चाहने लगे हो और तभी से हम दोनों ने यह सब नाटक किया था।

दोस्तों में तो उनके मुहं से यह बात सुनकर एकदम से डर गया था कि अब मेरे साथ क्या होगा, इसलिए में सिर्फ़ नीचे सर करके बैठा था।

अंकल : अरे तुम घबराओ मत, क्योंकि मुझे भी अपनी बीवी को मज़े करवाने थे।

फिर आंटी ने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रखा और फिर वो मुझसे कहने लगी।

आंटी : मुझे तो तुम उस दिन ही पसंद आ गय थे, जब मैंने तुम्हें बस में पहली बार देखा था और तुम उस दिन मुझसे चिपककर मेरे साथ वो हरकते करके मन ही मन बहुत खुश हो रहे थे और में भी जानबूझ कर तुम्हारा पूरा साथ दे रही और तब से ही हम दोनों ने यह सब प्लान बना लिया था।

दोस्तों उन्होंने मेरा चेहरा अपनी तरफ किया और मुझे स्मूच करने लगी। पहले मैंने उनका साथ नहीं दिया। फिर उन्होंने एक बार छोड़कर मेरी आँखो में देखा और फिर चालू हो गयी, उस टाईम में भी उनका पूरा साथ दे रहा था और हम दोनों करीब पांच मिनट तक स्मूच कर रहे थे और फिर मैंने देखा कि अंकल ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए थे और वो आंटी की दूसरी तरफ बैठे हुए थे।

अंकल : आअहह मज़ा आ गया सरला, तुम्हें ऐसे हर्ष को चूमते देखकर में पागल हो चुका हूँ, अब हम सभी और भी बहुत मज़े करेंगे और इसके साथ मज़े करके तुम इसके साथ साथ मुझे भी खुश कर दो, वाह मज़ा आ गया।

आंटी : ऑश आप भी ना यह क्या कह रहे हो?

अंकल : अरे हर्ष तुम भी तैयार हो जाओ, चलो आज हम दोनों तुम्हारी आंटी को बहुत मज़े करवाते है।

आंटी : आओ हर्ष में तुम्हारे कपड़े उतार देती हूँ।

अब में और आंटी दोनों खड़े हो गए थे, तभी आंटी मेरी टी-शर्ट और पेंट को उतारने लगी थी, लेकिन तभी अंकल ने पीछे से आकर तुरंत आंटी की मेक्सी को उतार दिया और वो सोफे पर बैठकर आंटी की गांड को चाटने लगे थे और अब हम तीनो एक दूसरे के सामने पूरे नंगे थे।

आंटी : आआहह ऑश।

अब में और एक दूसरे को पूरे जोश में आकर आंटी स्मूच कर रहे थे और में साथ साथ उनके बूब्स को भी दबा रहा था और अंकल पीछे से लगातार उनकी गांड को चाट रहे थे, जिसकी वजह से आंटी अब सिसकियाँ लेने लगी थी। वो उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्हह्ह वाह मज़ा आ गया कह रही थी। दोस्तों वो क्या मस्त नज़ारा था, फिर 5 से 10 मिनट बाद अंकल ने आंटी को थोड़ा और झुका दिया और उन्होंने आंटी के पीछे से अपना लंड अंदर डाल दिया, क्योंकि दोस्तों शायद अब अंकल को कंट्रोल नहीं हो रहा था। तब मैंने भी सही मौका देखकर आंटी के मुहं में अपना लंड डाल दिया। अब आंटी मेरा लंड लोलीपोप की तरह बहुत मज़े लेकर चूस रही थी और अंकल पीछे से उनकी चूत में लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहे थे।

अंकल : आहह सरला सच में आज बहुत मज़ा आ रहा है, आहहह ओहह्ह्ह।

दोस्तों कुछ देर लंड को बहुत अच्छी तरह से चूसने के बाद आंटी ने मेरा लंड अपने मुहं से बाहर निकाल दिया और तब उन्होंने मुझे कहा।

आंटी : आअहह्ह्ह हाँ जी सच में बहुत मज़ा आ रहा है, आपने पहले कभी इतनी दमदार चुदाई नहीं की थी, अहहहहह और ज़ोर से चोदो अहहहहह।

फिर वो एक बार फिर से मेरा लंड मुहं में लेकर चूसने लगी थी। फिर 10 मिनट बाद अंकल झड़ गये और वो सोफे पर बैठकर हांफने लगे, अब आंटी भी खड़ी हो गई और वो मुझे अपनी बाहों में लेकर मुझे चूमते हुए बोली।

आंटी : लो इनका तो पूरा काम हो गया, अब तुम मुझे आराम से चोदना और जैसा चाहे वैसे चोदना।

में : हाँ मेरी जान अब तो में ही तुम्हे चोदूंगा।

फिर में भी उनको किस करने लगा और उनका एक पैर सोफे पर रखकर आगे से उनकी चूत में अपना लंड ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर अंदर घुसाने लगा और लंड फिसलता हुआ अंदर जाने लगा, क्योंकि उनकी चूत में पहले से ही बहुत पानी निकल रहा था, जिसकी वजह से चूत बिल्कुल चिकनी हो चुकी थी। अब लंड के पूरा अंदर जाते ही में जोरदार धक्के देने लगा और मेरे हर एक धक्के से वो पूरी हिलने लगती।

आंटी : आअहह्ह्ह्ह उफफ्फ्फ्फ़ हर्ष थोड़ा धीरे धीरे चोदो ना, में क्या कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ, आईईईई।

में : ऊह्ह्ह आंटी आपकी चूत ही इतनी गरम, सेक्सी है कि में अपने आपको रोक नहीं पा रहा हूँ, में क्या करूं आप ही मुझे बताए?

आह्ह्ह आहहहाः ऊहहह उसके बाद मैंने आंटी को सोफे पर लेटा दिया और अब में उन्हें मिशनरी पोज़ में चोदने  लगा था और 25 से 30 मिनट की चुदाई के बाद आंटी दो बार और में एक बार झड़ चुका था। मैंने अपना पूरा वीर्य उनकी चूत की गहराईयों में डाल दिया और हम तीनों भी ऐसे ही थोड़ी देर थककर लेटे रहे। उसके बाद आंटी ने हमे खाना बनाकर दिया और हम सभी ने एक साथ बैठकर खाना खाया। उसके बाद एक बार फिर से हमारी चुदाई का खेल चला। मैंने उनको बहुत जमकर चोदा और चुदाई खत्म होने के बाद में अपने कपड़े पहनकर घर आ गया, लेकिन अब जब भी हमे कोई अच्छा मौका मिलता तो हम तीनों मिलकर चुदाई करते है और बहुत मज़े लेते है ।।

धन्यवाद …

Yoga Teacher Ki chudai Class Me Aasan Ke Sath

Yoga Teacher Ki chudai Class Me Aasan Ke Sath

हेलो दोस्तो, मैं करण आज आपको एक न्यू स्टोरी सुनता हूँ , ये कहानी मेरी ज़िंदगी की बहुत ही ख़ास कहानी है, आपको जरूर मजा आएगा, मुझे थोड़ा हिंदी लिखने में कठिनाई होती है अगर गलती हो तो समझ लेना थोड़ा, शब्द में क्या रखा है, मेरी वासना की भाव को फील करना, मैं नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे नया नया हु, पर कुछ मेरे साथ योग बाली मैडम के साथ बिता की मुझे भी लगा की आपको मैं अपनी कहानी सुनउँ. अब मैं बिना देर किये सीधे कहानी पे आता हु, मुझे पता है नहीं तो आप गालियां दोगे.

अभी कुछ दीनो से हुमारे यहा योगा का बड़ा चर्चा चल रहा है तो मेरे घर के पास ही एक योगा सेंटर खुला बिल्कुल नया मैं एक दिन इन्क्वारी लेने गया तो देखा एक बहुत ही मस्त भाभी आगे करीब 24-25 की होगी सब कुछ उनका फिट आंड फाइन शारीर देख कर मुझे लगा की मैं भी ज्वाइन करुंग. देखने मैं बहुत सुंदर नही पर उनका साफ़ रंग था काली या सावली नही कहेंगे लेकिन बॉडी बिल्कुल शेप मैं योगा टीचर थी तो बॉडी शेप मैं होगा ही एक दम 36.24.36 रीबॉक का ट्रैक सूट पहने हुए थी तो मैने वह पर दाखिला करवा लिया ले लिया बोली की आप कल सुबह 5 बजे वाला बॅच ज्वाइन कर लो अभी 4लोग है उसमे. तो मैने सोचा कहा भीड़ मैं मज़ा नही आएगा तो मैने बोला नो मैडम मुझे ये टाइम सूट नही करेगा ७ बजे वाला अगर हो तो ….

मैडम ने कुछ सोचा फिर बोली ठीक है पर आपको अभी अकेले ही सीखना होगा क्यू की भी उस टाइम पे कोई और नही है तो मैने हां बोला मैं तो यही चाहता था मन की एक मुराद तो पूरी हो गयी मैं मान ही मान खुश था तब वो बोली अरी हाँ आपके पास टाइट ट्रॅक तो है ना वो ले आना जीन्स मैं योगा नही होगा तो मैने बोला कोई नई मैडम मैं आज ही ले लूँगा और अगले दिन टाइम से चला गया मैडम सामने ही थी मैने प्रणाम किया हाथ जोड़ कर उसने भी रिप्लाइ किया आज तो और भी हॉट लग रही थी डीप नेक वाली टी शर्ट ट्रॅक पैंट एक दम टाइट मैडम बोली के योगा रूम अंदर है मैं उनके पीछे पीछे चल दिया बोली की चेंज रूम साथ वेल कमरे मैं है चेंज कर लो मैं तुरंत गया और चेंगे करके आ गया योगा रूम मैं बड़ा ही अजीब लग रहा था टाइट पैंट मैं फिर मैडम मेरे सामने बैठ गया मैं भी बैठा था और पहले कुछ योग के बारे मैं बताने लगी

फिर ध्यान लगाने को बोला अब उसने एक छोटा सा योग आसान बताया और मैं जान बुझ कर नही करने का नाटक करने लगा अब वो मेरे पास आई बोली कभी किया नही तुमने इसलिए एसा हो रहा है और मुझे बताने लगी ट्रेन करने लगी जब वो नीचे झुकती उसकी चूचियाँ साफ़ दिखाई देते ब्रा के साथ मेरा खड़ा हो गया और टाइट पैंट होने के करण सफ़फ़ दिखने लगा मैडम ने भी नोटीस कर लिया लेकिन क्या कर सकते थे

फिर मैडम एक दो छोटे योगा करवा कर बोली आज ये घर मैं करना और तुम्हारा ध्यान भटकता है सो कृपया फोकस करो योग पर सिर्फ. मैने सॉरी बोला और कपड़े चेंज करके बाहर आ गया नेक्स्ट दिन सेम टाइम फिर गया मैडम आज सारी मैं थी हॉट बूम लग रही थी खुला पेट श कयामत लग रही थी मैं चेंगे करके ढयन लगा रहा था मैडम भी मेरे साथ ध्यान लगा रही थी फिर मैडम ने बोला की कल वाली करके बताऊँ.

तो मैने कर के बता दिया बोली गुड आज कुछ और करते है लेट जाओ रिलॅक्स हो कर मैं लेट गया हटो को दोनो तरफ करो इधर करो उधर करो बता रही थी फिर मैने कोई ग़लती कर दी और सयद मैडम चाह रही की मैं ग़लती करू वो मेरे पास आई और झुक बोली ध्यान से करो सर को सामने और कुछ कुछ बता रही थी तभी उनका सारी का पल्ला मेरे अप्पर गिर गया और बूब के दर्शन हो गये मैं तो बस चूचियाँ को ही देखे जा रहा था कुछ वो भी मुझे ही देखती रह गयी

फिर सॉरी बोल कर सारी ठीक कर ली मैं वैसे ही लेते मैडम को बोला एक बात बोलू बुरा तो नही मनोगी बोली क्या बोलो मैने बोला आप बहुत ही सुंदर हो और मैं आपसे योग नही शिखा पाओगे. बोली क्यू क्या हुवा मैने कहा आप जो भी बोलती बताती हो मुझे कुछ नही सुनाई देता मैं सिर्फ़ आपके बारे मैं ही सोचता रहता हो और कल भी आज आपने मेरी हालत तो देख ली है तो उसने कहा हाँ

वो तो है पता है मैं यहा अकेली रहती हूँ दो तीन महीने मैं मेरे पति आते है बाहर काम करते है कल तुम्हारा देख कर मुझे रात भर नींद नही आई क्या करू मैं अभी जवान हूँ मेरा भी मन करता है सेक्स का तुम एक काम करो मैं तुम्हारी फ़ीस माफ़ कर देती हूँ और तुम मुझे खुश रखो मैं उनका हाथ पकड़ कर खिच लिया आपने ऊपर वो मेरे ऊपर आ गयी मैं उन्हे चूमने लगा किस करने लगा वो भी साथ दे रही थी आभी स्लो स्लो चल रहा था फिर सूँछ होने लगा मूह घुमा घुमा कर हर तरफ से सूँछ कर रही थी पूरा खिलाड़ी थी भाई आब मैं उनके आइज़ पे बरी बरी चुंबन देने लगा सर पकड़ कर तब वो बोली की अंदर चलो बेडरूम मैं वो वही रहती भी थी आपना ऑफीस अंडर से लॉक करके आ गयी बैडरूम मैं आते ही हम

फिर से स्टार्ट हो गये एक दूसरे से लिपट कर चुंबन करने लगे जब जिसे मौका मिलता और जहा मिलता चूम लेते मेरा हाथ आब सारी ऊपर से ही उनकी नितंभो को सहला रही थी और कभी पीठ को भी वो पागलो की तरह से चूम रही थी और चुंबन ले दे रही थी गर्दन मैं उसके आस पास सभी जगह कानो को मैं चूम कर दाँतों से काट रहा था वो आहह ह आह करण बहुत बाड़िया करो मुझे पूरा जकड़ लो करण ज़रा भी कुछ ना रहे करण प्ल्ज़ और टाइट पाकड़ो एर भी पास ना हो आज आह ह ऑश ईीई बहुत बाड़िया कर रहे हो बहुत बाड़िया करण जल्दी करो और आपने एक लेग को उठा कर मेरे लेग्स मैं मसलने लगी

आब मैं उसे गोद मैं उठा कर किश कर रहा था और ब बेड मैं लिटा दिया और वो उल्टा होकर लेट गयी सर को नीचे कर ली छिपा लिया फेस आपना मैं आप पीठ जो मेरे सामने था पीठ को चूमने लगा और उसके दोनो हाथो को आपने हाथो के साथ उपर कर दिया और चूम रहा था आब मैं उसके हॅंड्ज़ चूमता क्या लगभग छत ता हुवा गले तक आ गया और पीछे से ब्लाउज की हुक खोल दिया पाँच हुक थी जैसे ही हुक खोला ब्रा की हुक सामने थी मैने ब्रा की हुक के आस पास किस करते हुए ब्रा भी खोल दिया पूरा सपाट सेक्सी पीठ मेरे सामने आब बताने ज़रूरत नही मैने क्या किया होगा

फिर मैं नीचे लेग को चूमते हुए सारी को उपर उठता गया चूमता गया आब मैडम को सीधा लिटा दिया और उपर के सारे कपड़े हटा दिया पूरी चूचियाँ की दरशन हो गयी दोनो चूचियाँ को प्यार करने लगा दबाने लेगा आब एक लेफ्ट वाली बूब को मूह मैं लेकर चूष्ने लगा और दूसरे को दबाने लगा जीभ से निपल को गोल गोल चाटने लगा और मैडम आह हह ह एस दो इट एस करण खा जाऊ कतो ना और ज़ोर से करो चूसो आहह आ अब करण दूसरे को करो प्ल्ज़ मैं आब दूसरे मैं आ गया एस करण कारूऊ अहह ह्म करो करण बहुत बाड़िया तुम सेक्स का डॉक्टर हो करो मैं भी तुम्हारा लंड कहा है दो न मुझे इधर आह प्लीज, मुझे खुश कर दो ना करण प्लीज,

वो पागलो की तरह कर रही थी मैं भी भूखा शेर की तरह चूचियाँ से खेल रहा था आब मैने नीचे आते हुए चूमते किस करते पेट से गुज़रता हुवा नाभि पे आपनी जीव घुसेड दी मीन्स डाल दिया और नाभि को सक करते लगा जीव से गहरी नाभि को छोड़ रहा था वो मेरे बाल खिच रही थी और छटपटा रही थी मूह से बकबक किए जा रही थी आअहह ह उईईइ प्लज़्ज़्ज़ करण आआब डाअल दो आपना लंड प्ल्ज़ करणऔर मत तडपाऊ आअहह उम्म्म ह एट्सेटरा आब मैं उनकी पेंटी सारी सब उतार दी आब वो बिल्कुल न्यूड थी मैने भी आपना उतार दिया सब कुछ आब मेरा लंड उसके सामने था वो उठ कर बैठ गयी और मेरे लंड को बड़े प्यार से चूमा और बोली बनाने बाले ने क्या खूबसूरत चीज़ बनाया एसके बिना सब कुछ बेकार है राज और मूह मैं ले लिया और कई तरह से लंड चूसा मयझे बताना भी नही पड़ा और वो खुद ही चूस रही थी चाट रही थी, किस सब कुछ कर रही थी

फिर वो बोली जान आब तुम मेरे मुंह को चूत समझ के चोदो जितनी ज़ोर से कर सकते वो करो मैं तुम्हारे लंड को गले तक महसूस करना चाहती हूँ ये बोल कर लंड को मूह मैं ले लिया और आगे पीछे करने लगी मैं भी अब उनका सर पकड़ कर मूह को चोदने लगा और वो मूह के जीव से लंड को कभी प्रेस कर कभी उपर उठती और कई तरीके कर रही थी मैं भी वाइल्ड हो गया था डीप थोरट फक कर रहा था थोड़ी देर बाद

जब उसी तकलीफ़ होने लगी तो उसने लंड बाहर कर दिया बोली जान आब बस आब चूत की बरी है देखो क्या हालत हो गयी है चूत की कुछ करो चूत का तो मैं उसी लेता कर उसके दोनो लेग्स के बीच लेट गया और पैरो को फैला कर जीभ से चूत के चारो तरफ चाटने लगा आब चूत को फैला कर जीव डाल दिया एक दम आग के जैसा गर्म चूत मैं जब जीव जाता है तो बहुत ही मज़ा आता है मैं चूत के दाने को उपर नीचे गोल गोल जीव से ह्युमेन लगा वो अब चूत को उपर उठा दी जैसे कोई योगा का आसान हो चूत खुल कर कर बिल्कुल मेरे मूह के सामने आ गयी मुझे बस जीव लगा कर चाटना था थोड़ी देर बाद मैने एक एक करके दो उंगलियो को चूत मैं डाल कर अंदर बाहर करने लगा और दाने को चाटने लगा वो आअहह आह ऑश राज हो गया करण आब डाल दो करण मैं दो बार झड़ चुकी हूँ करण प्ल्ज़ आअहह आह श श फक मे करण फक मे

मैने भी देखा ये सही टाइम है चूत मैं प्रवेश करने का अब वो एक और आशण की पोज़ मैं गयी एक बड़ी ही सेक्सी आशण ये उस पोज़ का नाम है इस्मै डॉगी स्टाइल के जैसा ही होता है लेकिन लेग्स थोड़ा फैला होता है और सर बिल्कुल नीचे इस्मै चूत पूरा खुल जाता है और बाहर की तरफ आ जाता है जिससे लंड पूरी गहराई मैं आसानी से चला जाई आब मैने देर ना करते हुए ढेरे से लंड पेल दिया और कमर पकड़ कर आग्गे पीछे करने लगा मेरे लंड बहुत ही आसानी से चूत की गलियो गुज़रता जा रहा था चूत की कोमल हड्डिया लंड को और बेताब कर रही थी मैं कभी ज़ोर से पेलने लगता कभी आराम से अंदर बाहर करता कभी पूरा लंड बाहर खींच खींच कर पेलता तो कभी तोड़ा बाहर करके पेलता थोड़ी देर बाद उसने पोज़ चेंगे कर लिया इस बार धनूर आशण मैं गयी इस्मै साइड होकर खड़ी हो गयी और एक पैर उठा कर मेरे कंधे मैं रखा और एक हाथ को सामने दीवार मैं और मेरा लंड ठीक चूत के सामने था मैने लंड डाल दिया और पेलने लगा लेकिनवो तोड़ा अनबॅलेन्स लग रही थी छोड़ी मैं तो मैने उसके चूचियाँ को हाथ बड़ा कर पकड़ लिया और पेलने लगा वो च्चिलाने लगी आहह करण फक मे फुक्कककक करण फाड़ दो चूत को करण आज से मैं तुम्हारी हूँ करण तुम्हारा सारा खर्चा आज से मैं दूँगी करण फुक्क मि बहुत बाड़िया करण आहह ह फिर काफ़ी देर बाद मैने उसे गोद मैं उठा कर बेड मैं लेता दिया और बहुत ही सेक्सी स्टाइल मैं चोदने लगा चूचियाँ को दोनो हाथों से दबाने लगा चूष्ने लगा और वो बोले जा रही थी करो और ज़ोर और ज़ोर से झटके मारो करण करीब दस मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था बोला जान कहा निकालु बोली रूको मुझे निकलना है माल और मैं लेट गया

वो मेरे ऊपर आ गई और मूह मैं ले कर लंड को चूष्ने लगी उपर नीचे करने लगी काफ़ी सेक्सी लग रही थी और वो स्पीड से करने लगी मैं छूटने वाला था सरीर में अंगड़ाइयां आने लगे वो और फास्ट करने लगी और्र मेरा माल निकल गया उसने सारा माल पी लिया, दोस्तों यहाँ से शुरआत हुआ थे मेरे और योग बाली मैडम के साथ मेरा सेक्स सम्बन्ध अब तो मैं रोज रोज सेक्स करता हु, एक से एक पोज में.

Bhabhi Ne Kitchen Me Chodana Sikhaya - Sabse Sexy Stories

Bhabhi Ne Kitchen Me Chodana Sikhaya – Sabse Sexy Stories

हैल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम हर्ष है और मेरी उम्र 24 साल है और में दिल्ली में रहता हूँ. में इस साईड की कहानियाँ रोजाना पड़ता रहता हूँ और मुझे इसकी सारी कहानियाँ पसंद है. ये कहानी मेरी और मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी की है, जो कि बहुत ही हॉट है. में दिल्ली में किराये के रूम पर रहता हूँ, मेरे पड़ोस में एक बहुत ही हॉट भाभी रहती है और जिनका नाम शबाना है. अब में आपको शबाना के बारे में बता दूँ कि शबाना एक हाऊसवाईफ है और उसके दो बच्चे है, उनके पति के बिज़नेस था जिसकी वजह से वो ज्यादातर बाहर ही रहते थे.

शबाना भाभी दिखने में तो सावंली थी, लेकिन उनका फिगर बहुत ही मस्त था. में उन्हें जब भी देखता तो मेरा लंड खड़ा हो जाता और उसे चोदने का दिल करता था. वो मेरे बिल्कुल पड़ोस के फ्लेट में रहती थी, जब में नया-नया उस रूम में शिफ्ट हुआ था तो उन्होंने मेरे बारे में पूछा था. फिर मैंने उन्हें अपने बारे में बता दिया था, लेकिन मैंने उनके बारे में उस टाईम नहीं पूछा था. मुझे उनके बारे में बाद में पता चला कि उनके पति बाहर रहते है. फिर धीरे-धीरे मैंने उनसे बात करना शुरू किया और ऐसे हमारी अच्छी फ्रेंडशिप हो गई, वो कभी-कभी मेरे रूम पर आ जाती थी और हम काफ़ी देर तक बातें करते रहते थे.

फिर एक दिन मैंने देखा कि शबाना भाभी अपने पति से फोन पर बात कर रही थी और कह रही थी कि तुम्हें गये हुए कितने दिन हो गये है और अब तुम्हें आना ही होगा, मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है. ये सुनते ही मुझे पता लग गया कि शबाना भाभी लंड की प्यासी है तो में शबाना भाभी को चोदने की प्लानिंग करने लगा. फिर मैंने सोचते-सोचते एक प्लान बनाया और अगले दिन जब शबाना भाभी मेरे रूम पर आई तो मैंने उनसे कहा कि शबाना भाभी में होटल का खाना खाकर परेशान हो गया हूँ और आप प्लीज मुझे खाना बनाना सिखा दीजिए तो उन्होंने कहा कि ज़रूर में तुम्हें खाना बनाना सिखा दूंगी. फिर अगले दिन में खाना बनाने का सामान ले आया और भाभी से कहा कि मुझे खाना बनाना सिखा दीजिए. मेरे फ्लेट में एक छोटा सा किचन था तो उसमें एक ही आदमी खाना बना सकता था और उस टाईम उस किचन में हम दो लोग थे. अब आप समझ ही गये होंगे कि हम कितने करीब करीब होंगे. फिर खाना बनाते टाईम मेरा हाथ कभी-कभी शबाना भाभी की गांड से टच हो जाता था तो मैंने उन्हें सॉरी बोल दिया करता था और वो मुझे एक स्वीट सी स्माईल दे दिया करती थी.

फिर में अपने आपको शबाना भाभी के इतने करीब पाकर काफ़ी गर्म हो रहा था और इसी बीच शबाना भाभी का हाथ मेरे लंड से लग गया जो कि उनको अपने इतने पास सोचकर पहले से ही खड़ा था और उन्होंने मेरी तरफ देखा और एक सेक्सी स्माईल दी और कहा कि तू तो काफ़ी बड़ा हो गया है. ये सुनकर मैंने भी शबाना भाभी को स्माईल पास कर दी. फिर मैंने महसूस किया कि शबाना भाभी के हाथ मेरे लंड पर लगने से शबाना भाभी भी उत्तेजित हो गई है और फिर मैंने सोचा कि शबाना भाभी को फंसाने का ये ही सही मौका है.

शबाना भाभी खाना बना रही थी और मुझे बताती जा रही थी कि खाना ऐसे बनता है, वो मुझे खाना बनाते टाईम कूकर में कुछ दिखाने लगी तो में उनके पीछे से जाकर चिपक कर खड़ा हो गया, जिससे मेरा लंड उनकी गांड से महसूस होने लगा और में उनकी गांड पर अपना लंड का दबाव डालते हुए कुकर में देखने लगा, जिससे शबाना भाभी के मुँह से सिसकारी निकल गई ईईइसस्स. फिर मैंने सिसकारी सुनकर शबाना भाभी से पूछा कि भाभी क्या हुआ? फिर वो बोली कि कुछ नहीं. फिर ऐसे ही कुछ देर खड़ा रहने के बाद में हट गया.

फिर मैंने देखा कि मेरे हटने से शबाना भाभी थोड़ी दुखी हो गई. मेरा लंड मेरा पजामा फाड़कर बाहर आने को बेताब था, लेकिन अभी टाईम सही नहीं था तो इसलिए मैंने थोड़ा कंट्रोल किया और अपने हाथ से लंड को ठीक करने लगा तो ठीक करते हुए भाभी ने भी देखा और पूछा कि क्या हुआ? फिर मैंने कहा कि कुछ नहीं भाभी.

भाभी समझ गई कि में भी गर्म हो गया हूँ और में भी समझ गया था कि भाभी भी गर्म हो गई है. फिर थोड़े टाईम के बाद भाभी ने मुझे फिर से कूकर में कुछ दिखाया तो में भाभी से पहले से भी ज्यादा चिपक कर खड़ा हो गया तो भाभी के मुँह से फिर से सिसकारी निकली ईईइसस्स्सस्स और उन्होंने अपनी आँखे बंद कर ली और मज़े लेने लगी. फिर मैंने भी अपने लंड का सारा दबाव उनकी गांड पर डाल दिया और अब भाभी से कंट्रोल नहीं हुआ तो भाभी अपना एक हाथ पीछे ले गई और मेरे लंड को हाथ से पकड़कर दबाने लगी और इस बार मेरे मुँह से आआहह की सिसकारी निकली.

फिर मैंने अपने दोनों हाथ शबाना भाभी के बूब्स पर रख दिए और धीरे-धीरे दबाने लगा. ऐसे ही कुछ देर रहने के बाद में शबाना भाभी के लिप पर किस करने लगा और शबाना भाभी भी मेरा साथ देने लगी. फिर हम ऐसे ही एक दूसरे को किस करते रहे और में उनके बूब्स दबाता रहा और वो मेरा लंड सहलाती रही और फिर 10 मिनट के बाद में उनसे अलग हुआ और उन्हें गोद में उठाकर बेड पर ले गया और रूम का दरवाजा अन्दर से लॉक कर दिया.

फिर में शबाना भाभी के पास आया और उन्हें किस करने लगा और उनसे कहा कि आई लव यू शबाना भाभी तो उन्होंने भी आई लव यू टू कहा. फिर मैंने भाभी से कहा कि भाभी में तो जिस दिन से यहाँ पर आया था तो बस आपको चोदने के बारे में ही सोचता रहता था. फिर भाभी बोली कि में भी तुझसे कब से चुदवाना चाहती थी, लेकिन में कह नहीं पाई.

फिर मैंने कहा कि भाभी आप फ्रिक ना करो और आज में आपको चोदकर खुश कर दूँगा. फिर भाभी ने कहा कि हाँ हर्ष आज मुझे दिल खोलकर चोदना, आज मेरी सारी प्यास बुझा दो हर्ष, में बहुत दिन से प्यासी हूँ हर्ष. फिर मैंने भाभी के कपड़े उतार कर उन्हें पूरा नंगा कर दिया. फिर मैंने भाभी से कहा कि भाभी अब आप मुझे नंगा करो. फिर भाभी ने मुझे पूरा नंगा कर दिया और मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी और कहा कि आज तो बहुत ही मज़ा आने वाला है हर्ष.

फिर मैंने कहा कि क्यों नहीं भाभी. फिर भाभी मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी तो मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे में सातवें आसमान पर हूँ, वो मेरा लंड लॉलीपोप की तरह चूस रही थी और में उनके दोनों बूब्स दबा रहा था और मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी, आआअहह आआहह उउउह्ह्ह्हह्हह्ह्ह और ज़ोर से भाभी आअहह आआअहह. फिर मैंने भाभी को घोड़ी बनाया और उनके बालों को पीछे से पकड़ा और लंड को चूत पर रखकर एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरा पूरा लंड फच की आवाज़ करके एक ही बार में भाभी की चूत में चला गया तो भाभी के मुँह से उउउइईई की आवाज निकली और जिसे सुनकर मुझे बहुत मज़ा आया.

फिर मैंने अपना लंड भाभी की चूत से निकाला और फिर से उनकी चूत पर रखकर एक ज़ोरदार धक्का दिया, इस बार भाभी को भी मज़ा आया और उनके मुँह से आआहह की आवाज़ निकली. फिर में ऐसे ही ज़ोरदार धक्के लगाता रहा और पूरे रूम में आअहह आआहह आआहह और पुउऊउचुकक पुउऊउचुकक की आवाज गूंजने लगी. फिर 15-20 ऐसे ही ज़ोरदार धक्के लगाने के बाद मैंने भाभी से कहा कि मेरा माल निकलने वाला है तो भाभी ने कहा कि माल मेरे मुँह में ही निकालना. फिर मैंने अपना लंड भाभी की चूत से निकाल कर भाभी के मुँह में दे दिया और अपना सारा माल उनके मुँह में निकाल दिया. फिर भाभी मेरा सारा माल पी गई. फिर मैंने ऐसे ही भाभी को 1 महीने तक चोदा और फिर मैंने अपना फ्लेट चेंज कर दिया.

Telugu Aunty Fucked By Old Man Mms

Hindi Sex Stories – anjali Ki Dusri Jaberdast Suhagraat

प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, में मेरठ का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 23 है और में पिछले पांच सालों से लगातार कामुकता डॉट कॉम की सेक्सी कहानियाँ पढ़ रहा हूँ जो कि बहुत मजेदार होती है, जिनको पढ़कर मुझे बहुत मज़ा आता है। मेरे लंड का साईज़ 6 इंच है, जो कि मोटा भी है और किसी को भी संतुष्ट करने के लिए बहुत है।

दोस्तों कुछ समय पहले मेरे पड़ोस में एक भाभी रहती थी और उनका नाम अंजली था। जब उन्हें मैंने पहली बार देखा तो में तब से ही बस उनके सेक्सी जिस्म के बारे में ही सोचता था। पहली नज़र में ही वो मेरी आँखो में समा गई और तब से ही में मन ही मन उन्हें चोदने की बात सोचता था। फिर धीरे धीरे उनका परिवार हमारे परिवार के बहुत करीब आ गया और हमारे बीच बहुत सारी बातें होने लगी थी। वो भी हमारे घर आने जाने लगी थी और में भी कोई अच्छा बहाना बनाकर उनके घर पर चला जाता था और उनसे बहुत बातें किया करता था और इस तरह हम बहुत ही कम समय में एक बहुत अच्छे दोस्त बन गये और फिर अपनी छुपी हुई बातें भी एक दूसरे से करने लगे थे। फिर उसके साथ में अब हम सेक्स की बातें भी करने लगे थे। फिर एक दिन उन्होंने मुझसे बातों ही बातों में अपनी सुहागरात के बारे में भी सब कुछ बताया, उन्होंने क्या क्या किया, कितनी बार चुदाई की।

दोस्तों वो चुदाई की बहुत प्यासी थी और वो बात उन्होंने मुझे कुछ दिनों बाद में खुद बताई, क्योंकि वो अपने पति के साथ हर दिन सेक्स किया करती थी। फिर कुछ दिनों बाद उसका पति कुछ दिन के लिए किसी जरूरी काम के सिलसिले में शहर से बाहर चला गया तो वो और ज्यादा मेरे करीब होने लगी। वो कभी मुझे अजीब से इशारे करती, जो मुझे भी अब थोड़े थोड़े समझ में आने लगे थे, लेकिन में अपनी तरफ से पूरा पक्का करना चाहता था, ताकि बाद में कोई आपत्ति ना हो जाए। अब मेरे मोबाईल पर उनके कुछ ज्यादा ही गंदे गंदे मैसेज आने लगे थे तो में भी उन्हें वैसे ही मैसेज करने लगा था और फिर हर रात को फोन पर हमारी बातें होने लगी और कुछ सेक्सी बातें भी हमारे बीच होती थी। फिर ऐसे ही दो दिन निकल गये, बस हमारी फोन पर बात होती और हम दोनों सेक्सी मैसेज भेजकर एक दूसरे को अपने मन की बात बताते थे, लेकिन पहले हम दोनों में से कोई भी शुरुआत नहीं करना चाहता ना तो में उनसे बोल सकता था कि में आपको प्यार देना चाहता हूँ और ना ही वो मुझसे सेक्स के लिए बोल सकती थी। हमारी बात दोनों तरफ से ही एकदम अधूरी थी और दोनों ही सेक्स के प्यासे थे, लेकिन एक दूसरे से कहने से बहुत डरते थे और में सोचता था कि वो कभी कुछ गलत ना मान ले और वो भी मेरे बारे में यही सोचती थी। एक दिन में उसके घर पर चला गया, तब वो घर पर एकदम अकेली थी और हम ऐसे ही बातें कर रहे तो हमारी यह बात सेक्स पर जा पहुंची और वो बातें करते करते थोड़ी उदास हो गई। फिर मैंने उससे पूछा कि क्या हुआ भाभी? तब उसने मुझे सब कुछ बताया, क्योंकि तब तक हम सभी तरह की बातें एक दूसरे से करने लगे थे और तब मैंने उसे बताया कि में आपसे बहुत प्यार करता हूँ और आपको वो सब सुख दे सकता हूँ जो आपको चाहिए, हम दोनों एक दूसरे की ज़रूरत पूरी कर सकते है, लेकिन अगर आप चाहो तो? दोस्तों वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर तुरंत मान गई और फिर उसने मुझसे कहा कि तुम इस बात को बिल्कुल गुप्त रखना। फिर मैंने उनसे कहा कि आपके साथ साथ इस काम में भी शामिल हूँ और अगर बाहर किसी को पता चल गया तो हम दोनों की ही बहुत बदनामी होगी, इसलिए यह बात हमेशा हम दोनों के बीच में रहेगी और किसी तीसरे को कानो कान खबर नहीं होगी। फिर उन्होंने मुझे रात को अपने घर पर आने को कहा और मैंने भी ठीक है कहा और फिर मैंने उन्हें एक स्मूच किया और वहां से निकल गया और अब में अपने घर पर पहुंचकर बहुत बेसब्री से रात होने का इंतजार करने लगा था। मेरा एक एक मिनट एक दिन की तरह कट रहा था और रात को करीब 11 बजे उनका मेरे पास फोन आया। उसने मुझसे कहा कि तुम आ जाओ मैंने दरवाजा खुला छोड़ दिया है और में तुम्हारा इंतजार कर रही हूँ।

फिर में बहुत खुश होकर तुरंत अपनी छत से उनकी छत पर चला गया। उसके बाद मैंने दरवाजे को हल्का सा धक्का दे दिया, उन्होंने अपना ऊपर का दरवाजा ऐसे ही अटकाया हुआ था, जिसकी वजह से मेरा हाथ लगते ही वो खुल गया और में अंदर चला गया। फिर में सीधा उनके बेडरूम में जा पहुंचा, जहाँ पर पहुंचकर मैंने देखा कि वो मेकअप करके बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी हुई थी। फिर मैंने उससे पूछा कि यह सब क्यों? तब उन्होंने मुझसे कहा कि यह सब मैंने सिर्फ तुम्हारे लिए ही किया है। मैंने तुम्हें अपनी सुहागरात के बारे में पहले ही सब कुछ बता दिया था और उसी दिन मैंने मन ही मन सोच लिया था कि में अपनी दूसरी सुहागरात तुम्हारे साथ ही मनाउंगी और अपनी चूत को तुम्हारे लंड से चुदवाकर शांत करूंगी। दोस्तों में तो उनके मुहं से ऐसे शब्द सुनकर बहुत चकित हो गया। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि भाभी कभी मुझे यह सब शब्द भी कहेगी, लेकिन अब में वो सब सुनकर बहुत खुश हुआ। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर हम एक दूसरे पर टूट पड़े। हम सबसे पहले किस करने लगे, जिसकी वजह से वो बहुत गरम होकर जोश में आ गई थी और थोड़ी देर किस करने के बाद मैंने उससे कहा कि आज तो हम इतने मज़े करेंगे कि तुम मुझे हमेशा याद रखोगी और में तुम्हें अपने बच्चे की माँ बनाऊंगा। फिर वो भी मुस्कुराते हुए मुझसे हाँ कहते हुए मेरे बच्चे की माँ बनने के लिए तैयार थी। उसके बाद मैंने उनके एक एक करके सारे कपड़े उतार दिए और उन्होंने मेरे कपड़े उतार दिए, जिसकी वजह से हम दोनों ही बिल्कुल नंगे हो गये थे। अब में उनके सेक्सी जिस्म के हर एक हिस्से को चूसने लगा था और जब में धीरे धीरे चूमता हुआ उनकी चूत पर पहुंचा तो मैंने महसूस किया कि उनकी चूत पूरी गीली थी और अब मुझे बड़ा मज़ा आया और चूत को थोड़ी देर चाटने चूसने के बाद वो झड़ गई और में चूत रस को पीने लगा और फिर में दोबारा स्मूच करने लगा। करीब दस मिनट के बाद अब उनकी बारी थी तो उन्होंने तुरंत मेरा लंड पकड़ा और बड़े ही प्यार से अपने हाथ में लेकर आगे पीछे करने लगी और फिर उन्होंने लंड को अपने मुहं में ले लिया, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। में उस मज़े को शब्दों में नहीं बता सकता और कुछ देर बाद में उनके मुहं में ही झड़ गया और वो मेरा सारा वीर्य पी गयी। मैंने फिर से उनके बूब्स चूसना शुरू कर दिया और धीरे धीरे काटने लगा और ऐसा करने से हम दोनों को ही बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन दोस्तों हमें भी पता नहीं था कि हम क्या कर रहे है? उतनी ही देर में मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया तो उन्होंने मुझसे कहा कि अब ज्यादा देर मत करो प्लीज अब मेरी प्यास को बुझा दो जल्दी से अंदर डाल दो। फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुहं पर पर रख दिया और धीरे से धक्का देकर अंदर डालने लगा, तभी उनके मुहं से चीखने की आवाज़ निकल गई, अउउउहह आहहहहा उईईईईईई प्लीज थोड़ा और धीरे धीरे करो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है उफ्फ्फ्फफ् धीरे आहहहह, इसलिए मैंने धीरे धीरे धक्के दिए।

दोस्तों उनके कहने पर पहले तो मैंने अपनी स्पीड को बहुत कम रखा, लेकिन जब मुझे उनका दर्द कम होता हुआ महसूस हुआ तो में अपने धक्को को बढ़ाने लगा और अब में लगातार जोरदार धक्के देकर चुदाई करने लगा था और अब वो भी अपनी चूतड़ को उठाने लगी थी और मेरे साथ साथ अपनी चुदाई के पूरे पूरे मज़े लेने लगी थी। दोस्तों हमारी यह चुदाई करीब बीस मिनट तक चली और में उनके अंदर ही झड़ गया, लेकिन फिर भी में कुछ सेकिंड रुककर हल्के हल्के धक्के देता रहा और मैंने अपनी एक एक बूंद को उनकी चूत में डाल दिया, उनके चेहरे से मुझे उनकी संतुष्टि साफ साफ नजर आ रही थी। दोस्तों उस रात को मैंने उन्हें चार बार चोदा और हर बार अपना पूरा वीर्य उनकी चूत के अंदर ही छोड़ दिया और ऐसे ही उन्हें तब तक उनका पति नहीं आया जब तक कभी रात को तो कभी दिन में चोदता रहा और उसके बाद भी मैंने उन्हें बहुत बार चोदा और उनकी चूत के बहुत मज़े लिए और अब वो मेरे बच्चे की माँ है, माँ बनने के बाद उनके बूब्स से दूध भी बहुत आने लगा है, इसलिए में अब जब भी मुझे कोई अच्छा मौका मिलता है तो उनके घर पर चला जाता हूँ और उनके बूब्स को अपने मुहं में लेकर उनका गरम गरम दूध पीता हूँ ।।

धन्यवाद …

Collage Girl nice blowjob before fucking Hindi

Bhabhi Ne Jaberdasti Apni Chut Chatwaye

प्रेषक : सुरेश
हैलो, मैं सुरेश। मेरी उम्र २० वर्ष है। आपके लिये मै एक ऐसे स्टोरी लेकर आया हूँ जिसे पढकर आपका मन चोदने और चुदवाने का करने लगेगा। मेरे घर में चार भाई है और मेरे पिताजी है माँ का देहांत तब ही हो गया था जब मेरी उम्र ९ साल की थी। मेरे दो भाई मुंबई में सॉफ्टवेर इन्जिनेअर है जबकि सबसे बड़ा भाई हमारे
साथ ही जालंधर में रहता है। मेरे भाई की शादी हुई तो मैं बड़ा खुश हुआ कि जो माँ का प्यार माँ से नहीं मिला वह भाभी से मिल जायेगा। शादी के बाद भाभी हमारे साथ ही रहने लगी हम गाँव के सबसे बड़े परिवार से ह। पिताजी का धयान रखने के लिए नौकर तो था पर नौकर और घर के सदस्य में रात दिन का अंतर था। भाभी भी मुझसे मजाक किया करती।एक दिन की बात है मैं बाथरूम में नहाने जा रहा था तो मेने भाभी से मेरी अंडरवियर और बनियान मांगी। भाभी बोली कि देवर जी आप नहाना तो शुरू करो मैं ढूँढकर लाती हूँ मैंने कहा ठीक है जब मैं नहा लिया और मैं केवल एक पतला सा टॉवेल लपेटकर खडा था तभी भाभी आई और बोली कि लो अपने अंडरवियर लो यह कहकर वो दरवाजे के बहार खड़ी होकर दूर से अपना हाथ दिखा रही मेने भाभी से अंडरवियर लेने के लिए जैसे ही दरवाजा खोला भाभी ने दरवाजे में जोर से धक्का दिया और मेरे बाथरूम में घुस आई और मेरी कमर पर गुदगुदी करने लगी।

इस मजाक में वह हो ही गया जिसका मुझे डर था मेरा टॉवेल खुल गया और भाभी के हाथ में मेरा लिंग आ गया इसी बीच मैं शर्म के मारे बाथरूम से नंगा बाहर निकल कर भाग गया क्यूंकि उस समय घर पर मेरे और भाभी के अलावा कोई नहीं था इस बात पर मैं भाभी से इतना नाराज़ हुआ कि पूरा दिन बोला नहीं। पर शाम को वह मुझसे बोली कि सुरेश तुम मुझसे नाराज़ हो क्या तो मेने अपनी नाराजगी तोड़ते हुए न कहा दिया। अगले दिन जब मैं पढ़ाई कर रहा था तभी भाभी मुझसे बोली कि सुरेश मैं नहाने जा रही हूँ तुम कल की बात का बदला लेने की कोशिश मत करना, तो मैं बोला नहीं भाभी मैं तो उस बात को कबका भूल चूका हूँ।

तभी नहाते हुए भाभी बोली कि सुरेश मुझे एक साबुन लाकर दो मेरा साबुन खत्म हो गया है मैं बोला अभी तो मैं दुकान जाकर साबुन नहीं ला सकता। भाभी बोली कि दुकान से लाने को थोड़े ही कह रही हूँ, मेरे ड्रोर में रखा वहीं से ला दो। जैसे मैं साबुन लेकर आया तो भाभी दरवाजे में से मुह निकालकर झांक रही थी तो जैसे ही मैंने जैसे ही हाथ बढाया तो भाभी ने साबुन लेने के बहाने मेरा हाथ पकड़ कर खींच लिया और मैं बाथरूम में गिरने लगा तो भाभी ने हाथ पकड़कर मुझे संभाला तभी मेरा हाथ उनकी चूत पर पड़ गया। मैंने देखा कि भाभी बिलकुल नंगी खड़ी थी और उनके बूब्स बहुत बड़े थे और उनके निप्पल गुलाबी रंग के थे और उनकी चूत पर बहुत बड़े बाल थे और उन बालो के कारण चूत भी ठीक से नहीं दिख रही थी।

तभी मुझे अपन पेंट में कुछ रेंगने का अनुभव हुआ मैंने देखा जब तक तो भाभी मेरे पूरे कपडे (पेंट, अंडरवियर) दोनों उतार चुकी थी्। मैं भाभी के सामने बिलकुल निवस्त्र खडा था और भाभी मेरे लंड को बड़े मजे से चूस रही थी तभी भाभी ने नीचे लेट कर पोसिशन ६९ में आ गयी और अब वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उनकी न चाह कर भी उनकी बालो वाली चूत चाट रहा था थोडी देर बाद वह उठी और मुझसे अपना ७’ लंबा लंड मेरी चूत में डालने को कहने लगी

मैंने जैसे ही अपना लंड भाभी की चूत पर रख कर जोर से धक्का दिया वह भाभी की चूत में न जाकर वहां से फिसलकर पीछे की और सरक गया फिर भाभी बोली जानू ऐसे नहीं और फिर वह साबुन उठाकर अपने हाथ पर लगाकर मेरे लंड पर रगड़ने लगी फिर उसके बाद उन्होंने उतना ही साबुन अपनी चूत पर लगा दिया और फिर बोलीं कि जान अब धक्का दो जैसे ही मैंने जोर से एक धक्का दिया वह चिल्ला पड़ी आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईइह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फिर मैंने एक और झटका देकर पूरा लंड भाभी की चूत में समां दिया और अब उनका और मेरा शरीर आपस में रगड़ने लगे उस दिन भाभी ने मुझे जिन्दगी मैं पहली बार सेक्स करना सिखाया

लेकिन उस सेक्स के बाद मुझे उस गलती पर बड़ा पछतावा हुआ और मैंने भाभी के कितना भी उकसाने पर ये गलती न दोहराने का संकल्प लिया। एक दिन जब मैं बाज़ार सामान लेने गया तो मुझे रास्ते जाकर ध्यान आया कि मैं पैसे लाना तो भूल गया हूँ। जैसे ही मैं घर पैसे लेने वापस आया तो देखा कि भाभी एक नौकर के साथ चिपकी हुई थी मुझे देख कर वह दूर हट गयी और फिर नौकर मुझे देख कर चला गया तभी मैंने भाभी से पूंछा तो वह कहने लगी कि तुम्हारे भैया तो बस काम के कारण बाहर ही रहते है उन्हें तो मुझे संतुष्ट करने का तो उन्हें कोई ख्याल नहीं रहता और तुम भी मेरे साथ एक बार सेक्स करके ही रह गए अब तुम ही बताओ ऐसे में मैं क्या करूं

वह बोली तुम्हे तो मेरे साथ …….. ऐतराज़ है मै बोला ऐतराज नहीं है मैं इस काम को पाप समझता हूँ वह बोली कि तुम मुझे इस तरह खु्श करो कि तुमसे पाप भी न हो और मुझे मजा भी आ जाये। मैं बोला क्या सच में ऐसा हो सकता हैं वह बोली कि हाँ क्यूँ नहीं तो मैंने कह दिया ठीक है वो मुझे कमरे मैं ले गयी और मेरे होठ चूमने लगी तो मैंने मना किया तो वह बोली कि मैं तुमसे तुम्हारा लंड अपनी चूत में डालने को तो नहीं कह रही हूँ फ़िर उन्होंने मेरे पूरे कपडे उतार दिए फिर अपने कपडे भी उतार कर बैठ गयी और मेरा लंड जोर जोर से चूसने लगी तभी मेरी नज़र उनकी चूत पर गयी आज वह बड़ी सुंदर और चिकनी दिख रही थी अब मुझसे नहीं रहा गया और मैं अपना संकल्प भूलकर पोसिशन ६९ में आकर भाभी की चूत चाटने लगा।

फिर भाभी ने मुझे उठाकर मेरा मुंह अपने बूब्स पर रख दिया फिर मैंने दोनों स्तनों से नीचोड़ नीचोड़ कर स्तनपान किया और कुछ देर बाद भाभी की दोनों टांगें विपरीत दिशा में करके उनकी चूत पर लंड फेरने लगा भाभी के मुह से आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊउह्ह्ह्ह्ह ईईईह्ह्ह्ह्ह्ह निकल पड़ा तभी मैंने भाभी की चूत पर एक जोर से झटका मारा तो भाभी और तेज़ और तेज़ कह कर मेरा साथ देने लगी मेरा जोश यह सुनकर दुगना हो गया फिर भाभी और मैं एक साथ स्खलित हो गए उस दिन मुझे पहली बार से भी ज्यादा आनंद आया अब भाभी और मैं जब भी हमें मौका मिलता है तब यह खेल खेलते है।

धन्यवाद

Sasurji Ka Mota Garam Lund Chut Ke Andar

Sasurji Ka Mota Garam Lund Chut Ke Andar

मेरा नाम  अनुराधा है और मैं आपको एक सच्ची कहानी सुनाने जा रही हूँ. मेरी उम्र 24 साल है. यह बात एक साल पहले की है मेरी शादी को 28  महीने हो चुके थे पर अभी तक कोई बच्चा नहीं है. मेरे पति एक कंपनी में काम करते हैं और वे काम के सिलसिले में अक्सर बाहर जाते रहते हैं. मेरी सास नहीं हैं केवल घर में मेरे ससुर हैं वो फ़ौज़ से रिटाइर हुए हैं. बच्चा ना होने से हमारे घर का माहोल सदा सूना ही रहता है हमने चेकअप भी कराया है. रिपोर्ट में मेरे पति में कमी आई है लेकिन मेरे पति यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि उनमें कोई कमी है. वो कहते हैं समय आने पर बच्चा हो जाएगा. लेकिन मैं और मेरे ससुर चिंतित रहते हैं. मेरे ससुर तो कई बार मुझसे पोते की ज़िद कर चुके हैं और कह चुके हैं की मुझे पोता हर हाल में चाहिए. इस समस्या का समाधान करने की मैने एक प्लॅनिंग की. मैने सोचा क्यों न मुझे अपने ससुर से ही बच्चा पैदा करवाना चाहिए. इसके लिए मैं मौके की तलाश में रहने लगी.
एक दिन मेरे पति काम के सिलसिले में दो दिन के लिए बाहर गये. मैं इसी मौके की तलाश में थी. जबसे मेरी शादी हुई है तबसे मैं देख रही हूँ की मेरे ससुर अक्सर मुझे गन्दी निगाहों से घूरते रहते हैं मैं शरमा कर सर नीचे कर लेती हूँ. मैने उनकी नज़रों में हवस देखी है. उस दिन मैं रसोई में रात का खाना बना रही थी ससुरजी अपने कमरे में थे. तभी मैं दर्द का बहाना बना कर चिल्लाने लगी. ससुरजी दौड़े- दौड़े आए और बोले क्या हुआ बहू. मैं बोली पिताजी कमर में मोच आ गयी है अब क्या होगा. वो बोले चिंता की कोई बात नहीं बहू मैं हूँ ना. मैं बोली पिताजी खड़ा नहीं हुआ जा रहा है. वो बोले मैं तुम्हे कमरे में ले चलता हूँ. ऐसा कहकर उन्होने मुझे कमर से पकड़ा और मुझे बेडरूम की तरफ ले कर चलने लगे. उनके हाथों के स्पर्श से मैं उतेज़ित होने लगी. चलते-चलते मेरा हाथ उनके पायजामे में लंड से छू गया मैंने हड़बड़ा कर हाथ हटा लिया. उनकी होठों पर हल्की सी मुस्कान आ गयी. मैं समझ गयी की उन्हे भी यह अच्छा लगा.
उन्होने मुझे बेड पर लिटा दिया और बोले मैं डॉक्टर को बुलाता हूँ. मैं बोली पिताजी मेरी अलमारी में तेल की शीशी रखी है यदि आपको कोई ऐतराज न हो तो आप मेरी कमर पे लगा दीजिए मुझे उससे आराम हो जाएगा. वो बोले क्यों नहीं मैं अभी लगता हूँ. ऐसा कहकर वो तेल की शीशी ले आए.
वो बोले बहू तुम पेट के बाल लेट जाओ मैं तेल लगा देता हूँ. मैं पेट के बाल लेट गयी. मैं बोली पिताजी मेरी साड़ी उतार दीजिए नहीं तो इसमे तेल लग जाएगा. वो ये सुनकर हड़बड़ा गये और बोले तुम ही उतार लो बहू. मैं बोली मुझसे हिला नहीं जा रहा है आप ही खोल दीजिए ना. वो अपना हाथ मेरी कमर पर लाए और साड़ी खोलने लगे मैं पेट के बल उचक गयी जिससे साडी आराम से निकल जाए. अब मैं केवल पेटिकोट और ब्लाउज़ में थी. मैने कहा पिताजी मेरे ब्लाउज़ के हुक खोल कर तेल लगाइए ना. उन्होने ब्लाऊज़ के हुक खोले और तेल लगाने लगे. उनके हाथों के स्पर्श से मैं उत्तेजित हो गयी तभी मेरी नज़र उनके पाइज़ामे पर पड़ी मैने देखा की उनका लंड खड़ा हो गया है वो किसी तरह उसे शांत कर रहे थे मैं यह देख कर मुस्कराने लगी. मैं बोली पिताजी पायज़ामा उतार दीजिए नहीं तो तेल लग जाएगा. वो बोले हाँ बहू तुम ठीक कहती हो ऐसा कहकर उन्होने पायज़ामा उतार दिया अब वो सिर्फ़ नेकर में थे.
वो मेरी कमर पर तेल लगाते हुए बोले बहू पूरी कमर पर नहीं लग रहा है मैं बोली मेरी ब्रा के हुक खोल दीजिए उन्होने काँपते हुए हाथो से मेरी ब्रा के हुक खोल दिए मैने ब्रा को अलग कर दिया. अब उनका हाथ मेरी चुचियों तक जाने लगा उनके स्पर्श से मैं उत्तेजित हो गयी और बोली पिताजी थोड़ा और नीचे तक लगाइए ना. वो बोले नीचे पेटिकोट है हाथ नही जा रहा है. ऐसा सुनकर मैने पेटिकोट कन नाडा खोल दिया और बोली की अब जितनी इच्छा हो पेटिकोट नीचे कर लीजिए. ऐसा सुनकर वो खुश हो गये और मेरा पेटिकोट घुटनों तक नीचे कर दिया. अब मैं उनके सामने पेंटी में थी. मुझे शर्म भी आ रही थी. अब वो मालिश करते-करते अपने हाथ को मेरी पेंटी के अंदर डाल देते और मेरे चूतड़ो को मलने लगते. मेरी चूत गीली हो गयी.
अब वो धीरे-धीरे मेरे पेटिकोट को नीचे करते गये और फिर उन्होने उसे निकल दिया मैने कुछ नहीं कहा. अब वो मेरी टांगो पर भी तेल लगाने लगे. अब उनके हाथ मेरी गांड तक जाने लगे. और पता नहीं कब उन्होने अपना नेकर उतार दिया उनका लंड मेरे चूतडो को छूने लगा. फिर उन्होने मेरी पेंटी भी उतार दी और मेरे उपर लेट कर बोले बस बहू अब और नहीं सहा जाता अब तो अपनी चूत दे दो. मैं बोली पिताजी चूत मरवाने के लिए ही तो ये सब नाटक किया है. वो बोले सच मैने कहा हां .ऐसा कहकर उन्होने मुझे पलट कर सीधा कर दिया. अब मेरी चूत उनके सामने और उनका लंड मेरे सामने था. वो मेरी चूत को देख कर बोले ऐसी मस्त चूत मैने पहले कभी नहीं देखी. क्या मस्त माल है फिर वो मेरी चूत को चाटने लगे.  आप यह कहानी सेक्स समाचार डॉट कॉम पर पढ़ रहे है .  मेरी सिसकियाँ निकलने लगी. फिर मैं उठकर उनका लंड मुँह में भर कर चूसने लगी. वो मेरे चुचे दबाने लगे. मैं उत्तेजित हो कर बोली ससुर जी अब देर ना करो लोहा गरम है ठोक दो मेरी चूत अपने लंड से.
उन्होने मुझे सीधा लिटाया और मेरी टाँगे फैला दी अब अपने लंड को मेरी चूत के मुँह पर लाकर ज़ोर का धक्का मारा की लंड का सूपड़ा अंदर चूत को चीरता हुआ घुस गया. मैं दर्द से बिलबिला पड़ी मैं चीखने लगाई हाय मरी…..फट गयी मेरी उह……छोड़ो आह…… ससुर जी कहाँ रुकने वाले थे उन्होने धक्का मारना चालू रखा थोड़ी देर में सारा लंड अंदर घुस गया. मैं बोली आपने फाड़ डाली इतना मोटा लंड है जैसे किसी सांड़ का हो. वो बोले बहू तेरी चूत भी बड़ी टाईट है मेरा लंड फँसा हुआ है फिर उन्होने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए अब मुझे मज़ा आने लगा मैं बोली फाड़ डालो मेरे बलम मेरी चूत आह…. उई…. आईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई आहह……………मारो मेरी चूत फाड़ डालो अपने लंड से मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनूँगी वो बोले क्या चूत है ओह……आह…..उह…….वो बोले ऐसी चूत तो तेरी सास की भी नहीं थी मुझे पता होता की मेरी बहू की ऐसी मस्त चूत होगी तो तुझे ब्याह के पहले ही न ले आता. मैं बोली मुझे पता होता की मेरे ससुर का सांड जैसा लंड है तो मैं आपसे ही शादी करती. कमरे मै  च….. खच….. पच…… फ़चफ़च……….. फ़चाफ़च…..की आवाज़ें गूंजने लगी. वो बोले अब तो तेरी ही चूत मारा करूँगा बहू बोल मरवाएगी ना. मैं बोली अब तो मैं आपकी हूँ जब चाहो मुझे चोद लिया करो बालम. थोड़ी देर बाद ससुर ने अपना वीर्य मेरी चूत में डाल दिया और मुझे पेट से कर दिया.
अब वो मेरी गाँड पर तेल लगाने लगे मेरी ना नुकर के बाद भी उन्होने अपना लंड मेरी गाँड में डाल कर मेरी गाँड भी मारी. मुझे भी गाँड मरवाने में बड़ा मज़ा आया. अब तो हर रोज़ चोदम-चुदाई का खेल खेलते है. अब मैं अपने ससुर ही चुद्ती हूँ. 9 महीने बाद मैने एक लड़के को जन्म दिया मेरे पति खुश है की वो बाप बन गये लेकिन मैं ही जानती हूँ कि यह बच्चा तो मेरे ससुर का है.
आशा है आपको मेरी सच्ची कहानी पसंद आएगी. रिप्लाई जरुर करे …
धन्यवाद …