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Sex Stories – आंटी की छोटी बेटी की चुदाई

प्रेषक : गणेश …

हैल्लो दोस्तों, कैसे हो आप सब? में इस साईट का रेग्युलर रीडर हूँ, मेरा नाम गणेश है और में थाने मुंबई का रहने वाला हूँ, हाईट 5 फुट 10 इंच, स्लिम फिट बॉडी, लंड साईज 6 इंच और मेरी उम्र 23 साल है, में स्टॉक ब्रोकर एजेंट हूँ। दोस्तों यह स्टोरी एक साल पुरानी होगी, जब मेरे 12वीं क्लास के एग्जॉम को 1 महिना बाकी था।  हमारे घर के बगल में एक फेमिली रहती थी, लेकिन उन्होंने कुछ महीने पहले ही अपना रूम शिफ्ट किया था। उनके एक बेटी श्वेता और लड़का अमोल था। अमोल 9वीं क्लास में था और श्वेता 12वीं क्लास में थी। अब 12वी के एग्जॉम के 2 महीने पहले अंकल ने मुझे श्वेता को अकाउंट पढ़ाने के लिए कहा तो मैंने उस काम के लिए उन्हें हाँ कर थी, मुझे कोई प्रोब्लम नहीं थी और श्वेता को भी कोई प्रोब्लम नहीं थी, क्योंकि हम एक दूसरे को काफ़ी अच्छी तरह से पहचानते थे।

अब में श्वेता को रोजाना अकाउंट पढ़ाने जाता था, उसकी एक फ्रेंड थी अश्विनी और वो भी वहाँ पर पढ़ने  आती थी। वो दोनों काफ़ी अच्छी लड़कियां थी, लेकिन मेरे मन में उन दोनों के लिए कोई गलत सोच नहीं थी। अब वो दोनों खूब जी लगाकर पढ़ रही थी, जो में उनको पढ़ाता था वो लोग झट से याद कर लेते थे, उन दोनों ने काफ़ी हद तक अपनी कवर कर लिया था। अब एग्जॉम को सिर्फ़ एक महीना बाकी और बाद में अश्विनी का आना बंद हो गया, उसके घरवालों ने उस पर रोक डाल दी थी, लेकिन मैंने श्वेता को पढ़ाना जारी रखा। अब एग्जॉम के 1 महीने पहले श्वेता की नानी का स्वर्गवास हो गया और वो सब लोग अपने गावं चले गये। मुझे यह बात श्वेता ने कॉल करके बता दी थी अब हमारी पढाई बंद हो चुकी थी।

फिर कुछ 2 दिन के बाद मुझे श्वेता का कॉल आया और कहा कि में घर आ चुकी हूँ तुम मुझे पढ़ाने शाम को मेरे घर आ जाना, तो मैंने हाँ कहा और फोन रख दिया। फिर में उस दिन उसके घर गया और डोर बेल बजाई तो  सामने श्वेता थी और घर में कोई नहीं था। फिर  मैंने उससे पूछा कि अंकल और आंटी कहाँ है?  तब उसने कहा कि मम्मी पापा 10 से 12 दिनों के लिए गावं में ही है और मुझसे कहा कि पापा ने कॉल करने को कहा है। फिर मैंने अपने मोबाईल से अंकल को कॉल किया, तो अंकल बोले कि हम लोग 12 दिन तक नहीं आ सकते तो तुम श्वेता को पढ़ा कर अपने घर ले जाना और खाना खिला देना, वैसे उनकी और हमारी फेमिली के बहुत अच्छे रिलेशन थे, तो मैंने हाँ कहकर कॉल काट दिया।

अब में उनके हॉल में बैठा था, तभी मुझे श्वेता ने अपने बेडरूम में बुलाया और अब हम लोग रोजाना बेडरूम में ही पढाई करते थे। अब 2 दिन हो गये थे। फिर में तीसरे दिन जब श्वेता के घर गया और डोर बेल बजाई और श्वेता ने डोर ओपन किया तो ओह माई गॉड वो क्या लग रही थी? अब में अंदर गया और उससे कहा कि श्वेता तुम आज बहुत कमाल की लग रही हो। उसने पर्पल कलर का टॉप और ब्लेक कलर की टाईट शॉर्ट पहनी थी। दोस्तों मैंने अभी तक श्वेता का पूरी तरह से आपके सामने परिचय नहीं किया है। दोस्तों श्वेता दिखने में एकदम हरी भरी थी, रंग गोरा, साईज़ 38-30-38 की होगी। दोस्तों मेरे मन में आज तक श्वेता के लिए कुछ नहीं था, लेकिन आज जो उसने अपना रूप दिखाया तो में उसका दीवाना हो गया था।

अब उस दिन हम पढ़ रहे थे, लेकिन मेरा ध्यान अक्सर उसके बूब्स पर जा रहा था, कितनी भी कोशिश करके में अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। फिर मैंने तुरंत पढ़ाई बंद कर दी और श्वेता से बातचीत करने लगा। तभी मैंने उससे कहा कि तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? तो पहले तो उसने ना कहा, लेकिन मैंने उससे सच निकाल लिया, तो वो बोली हाँ एक लड़का है। तभी मैंने उसे सेक्स की तरफ खींच लिया, मगर अभी तक उनमें कुछ नहीं हुआ था सिर्फ़ किसिंग हुई थी और वो भी सिर्फ़ सिनेमा हॉल में ही। फिर मुझे हँसी आ गयी, लेकिन मेरा पूरा ध्यान उसके बूब्स पर ही था। अब पढ़ाई करते वक़्त मैंने उसकी क्लेवेज भी देख ली थी, क्या क्लेवेज थी उसकी? बाप रे बूब्स तो कमाल के थे। अब में सोच रहा था कि इसका बॉयफ्रेंड तो बहुत ही लकी होगा, अब इतने में मेरा लंड टाईट हो गया था और जो उसने भी नोटीस कर लिया था, अब उस दिन तो ज़्यादा कुछ नहीं हुआ।

फिर अगले दिन में उसके घर गया और अब श्वेता ने कल के जैसे ही कपड़े पहने हुए थे। अब में थोड़ा समझ गया था कि मुझे ग्रीन सिग्नल मिल रहा है, लेकिन डर भी लग रहा था कि कहीं कुछ ग़लत ना हो जाए। फिर कुछ 20 मिनट के बाद में लगातार श्वेता के बूब्स को देख रहा था और मुझे अपना ध्यान भी नहीं था। तभी अचानक श्वेता हंस पड़ी और में ऐसे बर्ताव करने लगा कि जैसे मैंने कुछ किया ही नहीं। अब श्वेता उठकर किचन में गयी और हमारे लिए जूस लेकर आई, लेकिन आते समय उसका पैर उसके पैर में अटक गया और पूरा जूस मेरे ऊपर गिर गया। फिर मैंने जाकर उसे उठा लिया और सोफे पर बैठा दिया। अब वो मुझे सॉरी कहने लगी और बार-बार सॉरी कहने लगी। फिर उसने अपने ही रुमाल से मेरा मुँह साफ करना चालू किया, उूउउफफफफफफ्फ़ यारो उसकी बॉडी की क्या स्मेल थी? आज तक श्वेता मेरे इतने करीब कभी नहीं आई थी, अब हम दोनों सोफे पर बैठे थे और वो मेरा मुँह साफ़ कर रही थी।

अब उसकी गर्म-गर्म साँसे मेरे चेहरे पर आ रही थी, तो अब मुझसे रहा नहीं गया और फिर मैंने झट से मेरा हाथ उसकी कमर पर रख दिया और उसे अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया। अब उसके बूब्स मेरी छाती को टच कर रहे थे, लेकिन श्वेता मुझसे दूर होना चाहती थी। फिर मैंने झट से उसके गालों पर किस कर लिया और उसने कहा कि ये तुम क्या कर रहे हो? तो मैंने कुछ नहीं कहा और उसे जाने दिया। अब में साफ़ होकर वापस उसको पढ़ाने लगा और बीच में उससे कहा कि जो तुम्हारे बॉयफ्रेंड ने अभी तक नहीं दिया है वो में दे सकता हूँ। फिर उसने मुझे इग्नोर किया और मैंने झट से उसका हाथ पकड़ लिया, अब वो मना कर रही थी और प्लीज प्लीज बोल रही थी। फिर मैंने कहा ठीक है। फिर उस दिन रात को श्वेता का मैसेज आया कि..

श्वेता –  गणेश अब तक मुझे किसी ने किस नहीं किया था, तुम पहले लड़के हो जिसने मुझे किस किया है, अब मुझे नींद नहीं आ रही है में क्या करूँ?

तो तब मैंने उसे रिप्लाई किया।

में –  तुम झूठ कह रही हो,  तुमने ही तो मुझे कहा था कि तुम्हारा बॉयफ्रेंड सिनेमा हॉल में किस करता है।

श्वेता –  वो मैंने तुमसे झूठ कहा था कि तुम मुझ पर हंस ना पड़ो इसलिए।

में – हाँ ठीक है, में अभी सो रहा हूँ, हम कल बात करते है और में तेरे घर जल्दी आ जाऊंगा, बाय, गुड नाईट।

फिर अगले दिन में उसके घर शाम के 4 बजे ही गया तो  वो सो रही थी और नींद में थी। फिर जब उसने अपना डोर ओपन किया तो उसने मुझे अपने बेडरूम में बुलाया तो में अंदर चला गया। अब वो बेड पर बैठी थी और मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया और उसके और नज़दीक आ गया। अब शायद दोनों तरफ आग लगी हुई थी। फिर मैंने उसे गालों पर किस किया, लेकिन इस बार श्वेता ने कुछ भी नहीं कहा। अब में उसे गालों पर किस करते करते उसके कोमल होंठो तक पहुँच गया, क्या सॉफ्ट होंठ थे उसके? फिर मैंने एक लम्बी किस ली। अब श्वेता भी गर्म हो चुकी थी और अब वो भी मुझे रेस्पोन्स दे रही थी। अब  हमने करीब 10 मिनट तक किसिंग की, जब श्वेता ने सिल्क पिंक कलर की गाऊन पहनी थी और उस पर उसके बूब्स क्या गजब ढा रहे थे?

अब में अपना एक हाथ उसके बूब्स रखकर बूब्स मसाज देने लगा, अब में ज़ोर-ज़ोर से उसके बूब्स दबा  रहा था, तो उसने कहा कि जरा आराम से करो, मुझे दर्द हो रहा है। अब यह सुनकर मेरा लंड 6 इंच फुल तन गया था। अब में बेड पर सो गया और मैंने अपनी टी-शर्ट निकाल दी। अब वो मेरी छाती पर किस कर रही थी, अब वो मेरे ऊपर थी। अब में अपने दोनों हाथों से उसकी सिल्क गाऊन धीरे-धीरे ऊपर खींच रहा था। तो अब उसकी गाऊन उसके पैर पर से सरकती-सरकती ऊपर आ रही थी। अब उसके टच ने उसे और भी मदहोश बना दिया था। फिर मैंने उसकी गाऊन कूल्हों तक ऊपर की, तो उसने ऊपर तक अपनी गाऊन ओढ़ ली और अब में उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसके स्पंची कूल्हों पर हाथ घुमाने लगा, क्या टच था? अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने उसकी पेंटी के कट से अपने दोनों हाथों को अंदर डाल दिया और पेंटी को नीचे खींच दिया तो उससे श्वेता और भी गर्म हो गयी और वो मुझे काटने लगी। अब उसके मुँह से सिसकारियां चालू हुई आआआअ आाईईईईईई ईईईईईईईईया आआआआआअ आआअहह आआहह। फिर मैंने उसे उठा लिया और बेड पर बैठने को कहा। फिर मैंने उसकी गाउन निकाल दी उूउउफफफफफ्फ़ क्या कमाल की लग रही थी यारो?  उसकी ब्रा तो बहुत ही सेक्सी थी वाईट कलर की और पेंटी भी कमाल की थी। अब मैंने भी अपनी जीन्स निकाल दी और उसके सामने अपनी अंडरवेयर में ही बैठ गया। अब उसमें से मेरा लंड सलाम कर रहा था और बाहर आने को मचल रहा था, अब में अभी बेड पर दीवार के सहारे बैठ गया और उसे मेरे ऊपर बैठा लिया। अब मेरी छाती पर श्वेता की पीठ थी तो में उसे उसके कंधे पर किस करने लगा। फिर मैंने उसकी गर्दन पर 3 से 4 किस दे दिए।

अब मैंने मेरे दोनों हाथ उसकी ब्रा में डाल दिए और उसको बूब्स मसाज देने लगा। उसके बूब्स थोड़े बड़े थे तो वो मेरे एक हाथ में पूरे नहीं समा रहे थे, लेकिन एकदम फ्रेश थे। अब बूब्स दबाते समय उसके मुँह से सिसकारी निकलनी चालू थी, आआहह आआअहह आआआअ। अब मैंने उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया, तो जैसे ही मैंने उसकी ब्रा को निकाला तो उसके बूब्स बाहर उछल पड़े, क्या लग रहे थे? फिर मैंने उसे थोड़ा टेड़ा करके राईट वाला बूब्स अपने मुँह में ले लिया और अब में लेफ्ट वाला बूब्स हाथ से दबा रहा था। अब उसकी मौन चालू थी, अब उसकी मौन मुझे उत्तेजित कर रही थी और अब श्वेता की साँसे भी तेज़ होती जा रही थी। इस दौरान मैंने मेरा हाथ उसकी पेंटी में डाल दिया उउउफ़फ्फ़ क्या मजा आया? उसकी चूत पूरी गीली थी। अब में समझ गया कि वो झड़ चुकी थी, अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था, अब में उसकी चूत में अपनी उंगली डालकर उंगली अन्दर बाहर करने लगा और बाद में उसके पानी का स्वाद चाटा तो उसका स्वाद मस्त था।

अब में आउट ऑफ कंट्रोल हो रहा था तो मैंने झट से उसकी पेंटी भी निकाल दी, उसकी चूत मस्त थी और एकदम गुलाबी थी। फिर में अपनी उंगली से उसकी चूत के दाने से खेलने लगा, एकदम मस्त चूत थी वो। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डालकर खुजलाना चालू किया और उससे वो पूरी तरह पागल हो गयी और कह रही थी गणेश प्लीज जल्दी करना, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है। इस दौरान उसने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून चुभा दिए थे और अब में झट से उसकी चूत चाटने लगा तो जैसे ही मैंने उसकी चूत को अपने मुँह से टच किया तो वो उछल पड़ी। फिर मैंने अपनी जुबान को उसकी चूत में और अन्दर डालने की कोशिश की, लेकिन मुझे जल्दी नहीं थी। इसी समय श्वेता ने पानी छोड़ दिया। फिर मैंने उसकी चूत का पूरा पानी पी लिया, मस्त स्वाद था उसका।

अब मैंने उसको अपना लंड चूसने को कहा तो उसने मेरी अंडरवियर नीचे की और मेरे फुल कड़क लंड को अपने कोमल हाथों में पकड़ लिया। फिर उसने मेरा लंड चूसना शुरू किया तो अब श्वेता ठीक तरह से नहीं चूस पा रही थी। फिर मैंने उसे बताया कि वो सिर्फ़ अपने होंठो के सहारे सक करे ना कि दांतों से। फिर वो समझ गयी और बराबर सक करने लगी। अब 10 मिनट के बाद में झड़ने वाला था, लेकिन मैंने जानबूझ कर मेरा पानी उसके मुँह में ही छोड़ दिया। फिर उसने मेरा थोड़ा सा पानी पी लिया, शायद उसे ये सब पसंद नहीं था, लेकिन मैंने उसे समझाया कि शुरू में ऐसे ही होता है, तुम एक दो बार और करोगी तो तुम्हें बहुत पसंद आ जायेगा। फिर हम 69 पोजिशन में आ गये। अब में नीचे था और वो मेरे ऊपर थी, अब में उसकी चूत को फुल स्पीड से चूस रहा था और वो भी अब अच्छी तरह से सक कर रही थी।

अब उसकी चूत चूसते वक्त उसके बूब्स नीचे लटक रहे थे तो में उनको अपने हाथों में लेकर सॉफ्ट मसाज देने लगा। अब में धीरे-धीरे उसके निप्पल को अपनी उँगलियों से खींचने लगा और अब में ज़ोर-ज़ोर से उसके बूब्स दबाने लगा था। फिर  कुछ देर के बाद में झड़ गया और उसने मेरा पूरा पानी चूस-चूसकर पी लिया। इस दौरान श्वेता भी दो बार झड़ चुकी थी तो मैंने भी उसका पानी पी लिया था, उसका नया- नया पानी था और वो पहली बार इस दुनिया में आया था तो उसका पानी जैसे ही बाहर आया तो वो मैंने पी लिया था। अब हम बेड पर ऐसे ही 69 पोजिशन में पड़े थे और अब हम दोनों थक गये थे। फिर मैंने श्वेता से चूसने को कहा तो  5 मिनट के बाद उसने सक करना चालू किया और मेरा लंड फिर से सलाम करने लगा। अब श्वेता भी मेरा लंड चूसती जा रही थी। फिर मैंने सोचा कि श्वेता को चोदने का यही सही टाईम है। फिर मैंने श्वेता को उठाया और बेड पर मेरे नीचे सुला दिया। अब में उसके ऊपर चढ़ गया था, अब श्वेता अपने हाथ फैलाकर लेटी हुई थी।

अब मैंने उसके दोनों हाथों को कसकर पकड़कर किस करना चालू किया, कभी उसके गालों पर तो कभी उसके होंठो पर तो कभी उसकी गर्दन पर बहुत सारे किस किए। अब मैंने कई सारे लव बाईट भी दे दिए। अब में उसके बूब्स चूस रहा था और अब मैंने उसके दोनों बूब्स पर निप्पल के बाजू में एक लव बाईट का सर्कल बना दिया था। अब श्वेता से सहा नहीं जा रहा था और अब वो पागल हो रही थी, तो उसने मुझे टाईट हग किया और कहने लगी कि फक मी डार्लिंग। अब में उसे चोदने के लिए बिल्कुल तैयार था, अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया और धक्का दिया, लेकिन वो वहाँ से फिसल गया। श्वेता ने फिर से मेरा लंड पकड़ लिया तो उसी टाईम मुझे फिर एक बार करंट लग गया। दोस्तों उसके हाथो का टच कुछ अलग ही था। अब उसने मेरा लंड पकड़कर चूत के ऊपर रख दिया और आँख मार कर सर हिला दिया।

अब मैंने धीरे-धीरे धक्का देना शुरू किया तो अब मेरे लंड का टोपा अंदर जा चुका था। अब श्वेता को दर्द हो रहा था, लेकिन अब तक मेरा पूरा लंड अंदर नहीं गया था। मैंने कंडोम नहीं लिया था, इसलिए मैंने अपना लंड श्वेता के मुँह में डालकर चूसने को कहा तो उसने चूसते समय मेरा लंड गीला कर दिया।  अब मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रख दिया और फिर एक बार धक्का दे दिया। अब मेरा आधा लंड अंदर जा चुका था, लेकिन यहाँ श्वेता का बहुत बुरा हाल था, क्योंकि उसकी चूत बहुत ही टाईट थी, उसकी चूत अभी तक सील पैक थी। फिर मैंने एक बार और धक्का दे दिया और अब इस बार मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। फिर श्वेता ज़ोर से चिल्लाई तो मैंने झट से उसके मुँह पर हाथ रख दिया और अब वो रो पड़ी थी। फिर में थोड़ी देर रुक गया और अब उसका दर्द कम हुआ और में वापस चल पड़ा।

अब में आगे पीछे होने लगा था और मैंने धीरे-धीरे अपनी स्पीड तेज कर ली थी। इस बार श्वेता मेरे लंड को अंदर लेकर बहुत मजे लेने लगी थी। अब मैंने उसे बेड पर करीब 10 मिनट तक चोदा और इस दौरान उसकी सिसकारियां मुझे पागल कर रही थी, आआआआ आआईयईईईई। अब मैंने उसे डॉगी स्टाईल में आने को कहा। फिर मैंने उसके बूब्स पकड़ लिए और में उसे डॉगी स्टाईल में चोदने लगा, करीब 15 मिनट तक चोदने के बाद में अंदर ही झड़ गया और हम दोनों टाईट हग करके करीब 20 मिनट तक नंगे ही बेड पर लेट गये। फिर मैंने श्वेता को बता दिया कि मैंने अपना पानी अंदर ही छोड़ दिया है तो वो डर गयी। फिर मैंने उससे कहा कि कल सुबह आई-पिल ले लेना, तो वो मान गयी। अब हम दोनों वापस बेड पर बैठ गये और शॉवर लेकर फ्रेश होकर खाना खाने मेरे घर चले गये। अब खाना ख़ाकर फिर मैंने श्वेता को रोज की तरह उसके घर छोड़ दिया और फिर मैंने वहाँ से मेरे घर कॉल किया और कहा कि में मेरे दोस्त के पास सोने जा रहा हूँ, लेकिन मैंने घरवालों से झूठ कहकर उस रात श्वेता की जमकर चुदाई की और पूरी रात हमने 6 बार चुदाई की ।।

धन्यवाद …

Sex Stories – दोस्त की वर्जिन बहन की चूत चुदाई फ्लैट में

मेरे दोस्त विपिन की बहन तानी मेरी फेसबुक फ्रेंड थी और मेरी कविताओं से बड़ी ही प्रभावित थी, होने को तो तानी मुझसे पांच बरस छोटी थी लेकिन वो अब कॉलेज की क्वीन थी और दिखने में इतनी क्यूट की कोई भी तानी पर मर मिटे. लेकिन तानी तो मुझ पर मर मिटी थी, दरअसल वो स्कूल टाइम से ही मेरी फेसबुक फ्रेंड बन गयी थी और मेरे लिखे शेर और कवितायेँ उसको काफी पसंद आते थे और जाने कब तानी के दिल में मैं घर कर गया. मुझे भी इसका बी=पता तब चला जब तानी के घर में मेरी बात हो रही थी और विपिन नए बताया की मेरे लिए एक लड़की का रिश्ता आया है जो एक्स मिस चंडीगढ़ रह चुकी है. तानी नए मुझे फेस बुक पर मेसेज कर के कहा “आप शादी कर रहे हो” तो मैंने भी मज़ाक में कह दिया “तुम कहो तो ना करू” उसका जवाब आया “मैं कह रही हूँ प्लीज़ मत करो ना”. हालाँकि मुझे ये सब विपिन को बता देना चाहिए था लेकिन जितनी उनकी फैमिली नामचीन और रईस थी उतनी ही पुराने ख्यालों की भी थी सो कहीं तानी को कोई शर्मिंदगी ना उठानी पड़े इसलिए मैं चुप रहा.

अगले ही दिन तानी का कॉल आया और वो बोली “डिम्पी मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ” मैं हैरान क्यूंकि जिस लड़की नए मुझे आप से नीचे नहीं पुकारा वो आज मेरा नाम ले रही थी और तू तडाके से बात कर रही थी, मैंने कहा “तानी तू भूल रही है तू किस से बात कर रही है” तो तानी नए कहा “मैं जानती हूँ तुम मेरी जान हो और मेरे ही रहोगे और हाँ चुपचाप मिलने आजाना और मेरे घर वालों या किसी को भी कुछ मत बताना”. मैं थोड़ी देर सोचता रहा और मैंने तानी को फ़ोन कर के कहा तेरे कॉलेज के बाहर हूँ आजा” तानी आई और उसने मुझे अपनी बाइक वहीँ पार्क करने को कहा और मुझे पानी कार में बिठा कर ले गयी. वो हाईवे पर जा रही थी और मेरी गांड फट के गुडगाँव हुई जा रही थी, मैं कहा “तानी कहाँ जा रहे हैं” तो बोली “बैठे रहो आज हम अकेले हैं और खुश हैं” फिर उसने जगजीत सिंह की ग़ज़लें लगा दी जो मेरी भी फेवरेट थीं.

तानी नए गाड़ी को कच्चे में उतार दिया जहाँ उसके पापा नए फ्लैट्स बना रहे थे, वहां पहुँच कर उसने चोव्किदर को गाड़ी की चाबी दी और कहा “सैंपल वाला फ्लैट रेडी है साहब को दिखाना है” चोकीदार ने मुस्कुरा कर दरवाज़ा खोल दिया और तानी मुझे सैंपल फ्लैट में ले गयी. ये फ्लैट पूरी तरह साफ़ सुथरा सजा धजा था और हर सामान ऐसे करीने से लगा हुआ था जैसे यहाँ आ कर बस रहना शुरू कर दो. तानी नए मुझे ड्राइंग रूम में बिठाया और बात शुरू की “देखो डिम्पी मैं बचपन से सिर्फ तुम्ही से प्यार करती हूँ और तुम्हारे बिना मर जाउंगी” मैंने  समझाया पर उसने मेरी एक ना सुनी और मुझ पर कूद पड़ी मैंने उसे हटाने की कोशिश भी की लेकिन तानी की खुशबु और उसके जिस्म की छुं से मैं पगला गया था और उसका साथ देने लगा.

तानी मुझे ड्राइंग रूम से बेडरूम में ले गयी और बोली “आज मैं तुम्हे अपना बना कर ही मानूंगी और तुम उस मिस एक्स चंडीगढ़ को भूल जाओगे”. बेडरूम में जा कर तानी और वाइल्ड हो गयी और उसने मेरे शरीर को ऐसे चूमना शुरू किया जैसे मैंने कोई स्वर्ग से उतरा हूँ, मैं भी तानी की रौ में बह गया और उसके कपडे उतारने लगा. उसका वो दुधिया जिस्म वो कमाल की मुस्कान और वो सेक्सी आवाज़जो तभी निकलती थी जब वो मूड में होती थी सब कितना मदहोश कर देने वाला था. तानी के कपडे उरने के बाद उसका चाँद जैसा बदन मेरे आगोश में था और वो हुस्न की मलिका मेरे जिस्म से खेलने को आतुर थी, मैंने तानी के गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होठों को चूमा और खूब चूसा और तानी भी मेरे होठों और जीभ को चूस रही थी. उसका ये सेक्सी रूप देखने लायक था.

हम दोनों बेड पर पड़े एक दुसरे के जिस्म से ऐसे खेल रहे थे जैसे ये सेक्स ना हो कर बचपन का कोई खेल हो, तानी नए मेरे लंड को सहला सहला कर इतना तो होश में ला ही दिया था कि मैं उसकी चूत को धन्य कर सकूँ लेकिन वो नहीं मानी और उसने अपने मुंह में मेरा लंड ले कर उसकी वो चुसाई की जो आज तक किसी ने भी नहीं की थी. मैंने तानी को सीधा लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ी कर के उसकी चूत जिस पर एक भी बाल नहीं था घुसा दिया तो तानी की चीख निकल गई और वो बोली “देखो डिम्पी मैं कहा था ना मैं तुम्हारे लिए ही सब कुछ संभाल रखा है, अब आज इस चमन को तुम्ही गुलज़ार  करोगे” वो बिलकुल मेरी कविताओं वाली भाषा में बात कर रही थी. मैंने तानी को वो जमकर चोदा की उसकी चूत में से खून निकल आया लेकिन उसने कहा “डरो नहीं मैं सब चेंज करवा दूंगी और किसी को कुछ नहीं पता लगेगा” तानी खून निकलने के बावजूद बस चुदे जा रही थी और अंततः झड़ भी गयी हालाँकि मैं उसे फिर भी चोदना जारी रखा क्यूंकि ऐसी कमाल की चूत मिले और आप उसे अधूरे में छोड़ दो ये कहाँ का इन्साफ है.

तानी ने जमकर मेरा लंड लिया और फिर मेरे झड़ने तक एक और बार झड़ी और फिर मुझसे लिपट कर सो गयी, शाम होने पर उसने मुझसे फिर प्रणय निवेदन किया जिसे मैंने स्वीकार भी किया और उस से वादा किया की मैं उसी से शादी करूँगा और फिर से हमने चुदाई मचाई. इस घटना के लगभग छह महीनों तक तानी को मैंने अलग अलग जगहों पर अलग अलग तरीकों से चोदा और एक दिन जब उसके पिता नए उसकी सगाई उस से बिना पूछे कहीं और कर दी तो तानी ने अपननी नसें भी काट लीं लेकिन उसके पिता नहीं माने. उन्होंने मुझे सम्जहय और तानी की शादी कहीं और कर दी, शादी के बाद तानी ने मेरा मुंह देखना भी बंद कर दिया था लेकिन कुछेक महीनों बाद वो वापस चुदने आई और इस बार तो पहले से भी ज्यादा हॉर्नी तरीके से चुदी  और बोली “जब तक ममेरी जान में जान है मैं तुम्हारी ही रहूंगी फिर भले किसी की भी बीवी रहूँ और तुम भी मेरे ही रहना भले तुम्हारी भी शादी हो जाए”.

Sex Stories – हरयानी लंड ओर देल्ही की गांड

विक्की हरियाणा के गाँव का एक साधारण जाट लड़का था, उम्र 20 साल, कद 5 फुट 8 इंच, मज़बूत कद-काठी। पढ़ाई करता था और फुर्सत में अपने खेत और बाग-बगीचे में काम करता था।
उसके घर के बगल एक पंजाबी परिवार रहता था।

 

एक बार की बात है, विक्की के पड़ोसियों के घर उनके एक रिश्तेदार का लड़का कुछ दिन के लिए दिल्ली से आया, उम्र बीस साल, दुबला-पतला, कद लगभग 5 फुट दो इंच और गोरा चिट्टा रंग, पतले पतले गुलाबी होंठ, बड़ी बड़ी चमकीली आँखें, तीखे नैन-नक्श। इतना सुन्दर कि अगर मेकअप कर दो और लम्बे बालों वाला विग लगा दो तो बिल्कुल लड़की लगे।

अपना जाट तो उसे देखता ही रह गया, इतना सुन्दर लड़का उसने पहले कभी नहीं देखा था। उसके अंदर उसे चोदने के अरमान जागने लगे।
जब भी वो लड़का विक्की के सामने से गुज़रता या फिर कभी उसकी नज़र उस लड़के पर पड़ती, उसका सात इन्च का मोटा लण्ड तन कर खड़ा हो जाता और फुंफकार मारने लगता, अगर उसका बस चलता तो वो उसे वहीं दबोच कर चोद देता।

एक बार विक्की किसी काम से अपने उन पड़ोसियों के घर गया, उसकी मुलाकात अपने चिकने से हो गई, चिकने का नाम था उत्कर्ष… अभी दिल्ली से ग्रेजुएशन कर रहा था, छुट्टी में अपने रिश्तेदारों के यहाँ आया था।

विक्की का डील-डौल और मर्दाना अंदाज़ उत्कर्ष को बहुत पसन्द आया। दोनों की नज़रें मिलीं और दोनों ने एक दूसरे को पसन्द कर लिया।
दोनों में बातचीत होने लगी।

एक दिन विक्की ने उत्कर्ष को गाँव दिखाने की बात कही।
उत्कर्ष मान गया, वैसे भी वो बोर हो गया था।

बस फिर क्या था, शाम को विक्की उत्कर्ष को अपने साथ घुमाने ले गया। पहले उसने उत्कर्ष को अपना आम का बाग़ दिखाया, फिर नहर जिससे पूरे गाँव के खेत खलिहान सींचे जाते थे।
रास्ते में चलते चलते विक्की ने उत्कर्ष के कन्धों पर अपनी बाँह रख दी, उत्कर्ष भी उससे सट कर चलने लगा।

अब तो विक्की लण्ड बल्लियों उछलने लगा।
‘चलो, तुम्हें अपने गन्ने का खेत दिखाऊँ!’

विक्की उसे अपने गन्ने के खेत में ले गया, पगडण्डियों, खेतों और झाड़ियों के बीच से होते हुए वो विक्की के गन्ने के खेत पहुँचे।
मार्च की शुरुआत थी, खेतों में गन्ने पूरे शबाब पर खड़े लहलहा रहे थे।

विक्की उत्कर्ष का हाथ पकड़ कर उसे खेत के अंदर ले गया।
उत्कर्ष को अपने पास पाकर वो बहुत खुश था और अब तो उसे अकेले में, अपने खेत के अन्दर ले आया था।

उसके मन में ख़ुशी और जोश का फव्वारा फूट रहा था कि वो कैसे उत्कर्ष को दबोचेगा, कैसे उसे किस करेगा, कैसे वो उत्कर्ष से अपना लण्ड चुसवाएगा… यही सब सोच सोच कर उसका लण्ड पूरे उफान पर खड़ा होकर फुंफकार मार रहा था, इतना कि उसकी नेकर में खम्बे जैसा खड़ा हो गया था और साफ़ दिख रहा था।

उत्कर्ष ने भी उसकी निक्कर के तम्बू को देखा, स्वाभाविक है, जब लण्ड पूरा टाइट खड़ा हो तो साफ़ दिखेगा।
उसके मन में भी लडडू फूटने लगे, वो विक्की की नीयत भाँप गया था और उसने उसका तम्बू देख कर विक्की के लण्ड की साइज़ का अंदाज़ा भी लगा लिया था, उसके भी मुँह में पानी आ गया था।

दोनों खेत के अन्दर दाखिल हो गए, हर तरफ ऊँचे ऊँचे गन्ने… अभी भी विक्की उत्कर्ष का हाथ पकड़े था, उसके और करीब आया, उसकी आँखों में देख कर, मुस्कुरा कर बोला- क्यों कैसा लगा मेरा खेत?

उत्कर्ष मुस्कुराया और शरमाते हुए बोला- बहुत अच्छा !

उसकी शर्मीली मुस्कान ने विक्की के दिल पर बिजली गिरा दी और उससे रहा नहीं गया, उसने झट उत्कर्ष को बाँहों में भर लिया- तुम बहुत सुन्दर हो!
उसने उत्कर्ष को उसी तरह आँखों में डालते हुए कहा।

‘यह क्या कर रहे हो?’ उत्कर्ष ने घबराते हुए कहा।
‘मेरी जान… मैं तुम्हे पेल दूंगा!’ इससे पहले की उत्कर्ष कुछ कहता, विक्की ने उसके होंटों पर अपने होंट रख दिए।
उत्कर्ष को ऐसा लगा जैसे वो विक्की की बाँहों में पिघल रहा हो, वो भी उससे लिपट गया।

दोनों ने बहुत देर तक एक दूसरे को बहुत प्यार से किस किया।
उत्कर्ष को उसकी सख्त रॉड अपने पेट पर फड़फड़ाती हुई महसूस हो रही थी।

विक्की ने अपनी नेकर नीचे खींची और अपने बावले लण्ड को आज़ाद कर किया, थोड़ी देर और बंद रहता तो शायद खुद ही उसकी जींस फाड़ कर बाहर आ जाता।

उत्कर्ष के मुँह में पानी आ गया।

विक्की का लण्ड सात इंच का था, मोटाई भी मस्त थी।
उत्कर्ष ने आव देखा न ताव फ़ौरन नीचे झुक घुटनों के बल बैठ गया और उसका लण्ड मुँह में ले लिया, उसके लण्ड से वीर्य की तेज़ गन्ध आ रही थी।

उसका लण्ड इतना मोटा था कि उत्कर्ष का पूरा मुँह भर गया, उत्कर्ष मस्त होकर लण्ड चूसने लगा।
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विक्की तो जैसे आसमान में उड़ने लगा, उत्कर्ष उसके लण्ड को अपनी जीभ से सहलाता, उसे अपने मुलायम मुलायम गुलाबी होठों से दबाता, उसका स्वाद ले-लेकर उसे चूसता, उसका रस पीता… इतने प्यार से उसका लण्ड आज तक किसी ने नहीं चूसा था।

वो उत्कर्ष के कन्धे थामे, उसके बाल सहलाता अपना लण्ड चुसवा रहा था, उसका मन तो कर रहा था कि वो हमेशा के लिए, इसी तरह उत्कर्ष के मुँह में अपना लौड़ा घुसेड़े खड़ा रहे।

वो गन्ने के खेत में खड़ा, उत्कर्ष के बाल सहलाता अपना लण्ड चुसवा रहा था और आनंद से आहें भर रहा था- ओह्ह्ह… !!! यह्ह्ह्ह… !!!

उसी के साथ उत्कर्ष भूखे कुत्ते की तरह उसका लण्ड लॉलीपॉप की तरह चूस रहा था।
इतना मज़ेदार रसीला लण्ड मुश्किल से मिलता है इसीलिए वो पूरे जोश के साथ चूस रहा था। विक्की की मदमस्त आहों के बीच उसके चूसने की भी आवाज़ आ रही थी- लप… लप.. लप…!!

अब विक्की से नहीं रहा जा रहा था, उसका मन चुदाई का हो रहा था। उसने अपना लण्ड वापस खींचा और उत्कर्ष को कंधे से पकड़ कर खड़ा कर दिया।
‘खड़ा हो… घूम जा…’

उत्कर्ष को पता चल गया कि विक्की उसकी गाण्ड मारने वाला है- यार, प्लीज़ धीरे करना… मुझे ज़्यादा आदत नहीं है।
विक्की ने अनसुना कर दिया, उसे तो बस अब जल्दी थी कि उसकी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दे और चोद दे- झुक…

उसने एक-एक शब्दों के निर्देश देने शुरू कर दिए, बहुत जल्दी में था, उसका लण्ड बहुत बेताब हो रहा था उत्कर्ष की गाण्ड में घुसने के लिए।

उत्कर्ष के घूमकर झुकते ही उसने अपने लण्ड के सुपारे पर थूका और उसे एक हाथ से पकड़ कर उससे उत्कर्ष की गाण्ड का छेद टटोलने लगा।
उत्कर्ष की गाण्ड गोरी-गोरी, मुलायम और चिकनी थी, एक भी बाल नहीं था। विक्की को उसकी गाण्ड देखकर बहुत अच्छा लगा। ऐसा सुन्दर लड़का बहुत किस्मत से मिलता है।

‘टाँगे फैला…’ उसने फिर हुकुम दिया।
उत्कर्ष ने टाँगें फैला दी, विक्की ने छेद पर अपना सुपारा टिकाया और एक ज़ोर का धक्का मारा।
‘अह्ह्ह्ह…!!!’ उत्कर्ष की चीख निकल गई।
विक्की का आधा लण्ड उसकी गाण्ड में घुस चुका था।

कहीं उत्कर्ष भाग न जाये इसलिए उसने उसे एक कंधे से मज़बूती से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसे कमर से दबोच लिया और फिर एक ज़ोर का झटका मारा।
‘अहहह…!!’ उत्कर्ष की दर्द भरी चीख निकल गई।

लेकिन विक्की को उसकी परवाह नहीं थी।
उस सुनसान गन्ने के खेत में दूर दूर तक कोइ नहीं था।

अब विक्की ने उसको दोनों हाथों से उसको कमर से दबोचा और अपना लण्ड हिलाने लगा।
उत्कर्ष की हालत ख़राब हो गई, उसने अभी तक सिर्फ तीन-चार बार ही चुदवाया था, ज़्यादा आदत नहीं थी उसे… उसका छेद बहुत टाइट था और यही बात विक्की को बहुत पसन्द आई, इतना सुन्दर, चिकना लड़का और ऊपर से गोरी-गोरी, टाइट, कोरी, चिकनी मुलायम गाण्ड!

‘अहह.. ऊह… अहह… ऊह्ह… अहह… !!’ उत्कर्ष के लयबद्ध होकर सिसकारियाँ लेनी शुरू की।
‘अह्ह्ह… विक्की… अह्ह्ह… प्लीज़… धीरे… !!’ उत्कर्ष से उसके थपेड़े नहीं सहे जा रहे थे।
लेकिन हमारे जाट भाई को बहुत मज़ा आ रहा था, वो गपर गपर उत्कर्ष की मखमली गाण्ड मार रहा था।

‘और झुक…’ उसने लण्ड हिलाते हुए उत्कर्ष को हुकुम दिया लेकिन उत्कर्ष और चुदवाने के मूड में नहीं था, वो भागने के चक्कर में था, बहुत दर्द हो रहा था उसकी गाण्ड में।

विक्की ने ज़बरदस्ती उसको नीचे दबोच दिया, उसको घुसेड़ने में अब आसानी हो गई।

उत्कर्ष ने एक गन्ने के ठूँठ का सहारा लिया और उसी तरह आहें भरता, असहाय चुदवाता रहा ‘अह्ह… ऊह्ह्ह… ऊह्ह्ह… !!’
और इधर विक्की अपनी कमर हिला-हिला कर उसे चोदे जा रहा था, उसका लौड़ा पिस्टन की तरह उत्कर्ष की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था और आवाज़ कर रहा था ‘गप… गप… गप…!!’

यह गप-गप की आवाज़ इतनी ज़ोर की थी कि अगर आप उनके नज़दीक होते तो उत्कर्ष की दर्द भरी सिसकारियों के बजाये उसे सुन सकते थे।

उत्कर्ष का कराहना तड़पना विक्की का मज़ा दुगुना कर रहा था, उसको और जोश चढ़ा और उसने उसी जोश में उसने बेचारे चुदते हुए उत्कर्ष के चूतड़ पर एक चपत जड़ दी।
‘अह्ह्ह्ह…!!’ बेचारा करहा उठा- कम से कम मारो मत…!

लेकिन विक्की उसके चिल्लाने-तड़पने की परवाह किये बिना उस पर जुटा पड़ा था, आज उसका लण्ड ऐश कर रहा था।
दोनों को चुदाई करते अब दस मिनट हो चले थे, उत्कर्ष घबरा रहा था कि उसके घरवाले परेशान हो रहे होंगे और उसे ढूँढ रहे होंगे, लेकिन ये गाँव का गबरु तो उसे छोड़ ही नहीं रहा था।

अपनी सिसकारियाँ थाम कर उत्कर्ष बोला- बस करो विक्की… छोड़ दो… बहुत देर हो गई है…

‘छोड़ रहा हूँ… यहहह… बस्स्स्स… दो… दो मिनट और… अआह्ह्ह… आने वाला है… यआह… !!’ विक्की ने हवस भरे मदमाते स्वर में जवाब दिया।
अब वो झड़ने वाला था।
बस एक दो धक्के और फिर विक्की अपना लण्ड उत्कर्ष की गाण्ड में फुलाता झड़ गया।

उसने हल्के से अपना लण्ड बाहर निकाला, बेचारे उत्कर्ष को राहत मिली, वो न जाने कितनी देर से गन्ने के ठूंठ का सहारा लिए, झुका हुआ अपनी गाण्ड मरवा रहा था।
उसने विक्की का लण्ड देखा, उसी तरह गुस्साए नाग की तरह तन कर खड़ा था, एक वीर्य की बूँद भी उसके छेद पर उभर आई थी।
दोनों ने फटाफट अपने कपड़े पहने और वहाँ से चल दिए।

Sex Stories – मेरी बुआ ओर मेरी चुदाई की कहानी

लेखक – दीनू

मित्रो नमस्कार..

मेरा नाम दीनू है और मैं मध्यप्रदेश का रहने वाला हूँ और अब मैं मुंबई मे रहता हूँ, अपने परिवार के साथ और सुखी जीवन व्यतीत कर रहा हूँ.

पर इतनी सारी कहानियां पढ़ने के बाद, मेरे मन मे भी अपनी कुछ सच्ची घटना साझा करने की इच्छा हुई तो आप लोगों के सामने उसे शब्दो मे उतारने की एक कोशिश कर रहा हूँ.

मैंने मेरी सेक्स स्टोरी पर कई कहानियाँ पढ़ी है, कुछ सच्ची लगी और कुछ झूठ लेकिन दोस्तों अब मैं अपनी एक सच्ची घटना आप लोगों के साथ साझा करना चाह रहा हूँ..

बात उन दिनों की है, जब मैं नया – नया जवान हुआ था..

उस समय, मेरी उम्र 18 – 19 साल थी और मैं 12 कक्षा मे पढ़ता था और बहुत डीटेल्स मे ना जाते हुए मेरी कहानी मे आता हूँ..

मेरी एक बुआ हैं कीर्ति, वो मुझसे करीब 15 – 16 साल बड़ी है. उस समय उनकी उम्र लगभग 35 – 36 साल रही होगी.

वो बहुत ही खूबसूरत हैं, बिल्कुल किसी हीरोइन की तरह, बहुत ही गोरी और उनका फिगर तो क्या कहने.

पतले होंठ, गोरे – गोरे गाल और छोटे छोटे निप्पल और उनकी कमर तो पूछो ही मत.

मैंने हज़ारो बार उनके नाम की मूठ मारी है. मन तो बहुत करता था उनको चोद्ने का पर बुआ तो ठहरी, कोई रिस्क नहीं ले सकता था घर का मामला था.

आप लोगों को ज़्यादा ना पकाते हुए मैं अब अपनी कहानी मे आता हूँ, कहानी कुछ इस प्रकार से है –

गर्मियों के दिन थे..

हमारे गाव मे लोग गर्मी मे बाहर खुले छतों मे या घर के बाहर सोते है, सो हम लोग भी गर्मियों मे खुले छत के नीचे सोते थे.

बुआ आई हुई थी, हम सभी ने खाना खाया और सोने के लिए ऊपर छत पर चले गये.

मैं और मेरी बुआ बातें करते रहे देर रात तक, और बुआ को बात करते करते नीद आने लगी.

और उन्होंने मुझसे कहा की अब सोते है, बाकी की बातें कल करेंगे…

मैं सोने को तैयार तो हो गया पर मेरे आँखों मे नीद कहा थी..

मैं तो कैसे भी उनके अंगों को छूने की कोशिश कर था.

इसलिए मैं उनके बगल मे ही लेट गया और सोने का नाटक करने लगा..

थोड़ी देर मे, मैंने ये चेक करने के लिए की बुआ जाग रही है या सो गई हैं, मैंने कापते हाथो से उनकी कमर पर हाथ रखा और चुपचाप कोई प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करने लगा.

जब मुझे पूरा यकीन हो गया की वो सो चुकी है तो फिर मैंने उनके सीने मे धीरे से हाथ रखा और धीरे – धीरे उनके मम्मो को सहलाने लगा..

थोडी देर के बाद, जब कोई विरोध नहीं हुआ तो फिर मैंने और हिम्मत दिखाते हुए उनकी साड़ी के अंदर हाथ डालने की कोशिश करने लगा और थोड़ी ही देर मे मुझे सफलता मिल भी गई और मेरा हाथ उनकी साड़ी के अंदर उनकी पैंटी को छू रहा था.

मैं थोड़ी देर, वैसा ही लेटा रहा और फिर थोड़ी देर बाद और हिम्मत करके उनकी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया.

क्या बताऊँ दोस्तों, कितनी चिकनी चूत थी, बिल्कुल मक्खन की तरह.

मैं अपना हाथ डाल कर रुक गया और किसी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करने लगा, जब काफ़ी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो मैंने धीरे – धीरे चूत सहलाना शुरू किया और अपनी एक उंगली उनकी चूत के छेद मे..

मैंने फील किया की वहाँ पर कुछ गीला – गीला है..

मैं काफ़ी देर तक चूत को सहलाता रहा और करीब 15 मिनिट मे ही मुझे उनके अंदर बहुत गीला – गीला महसूस हुआ और बुआ के मुँह से सिसकारी निकल गई और उन्होने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी साड़ी से बाहर निकाल दिया.

मैंने भी डर के कारण और आगे कुछ नहीं किया और चुपचाप वहाँ से किनारे होकर सो गया.

सुबह जब हम सोकर उठे तो सब कुछ नॉर्मल था, पर मैं बुआ से नज़रें नहीं मिला पा रहा था.

आगे की कहानी मैं आप लोगों की प्रतिक्रिया जानने के बाद मे लिखूंगा.

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मेरा परिचय तो आप जानते ही हैं.. मैं रितेश शर्मा। मैं ताज नगरी आगरा का रहने वाला हूँ।
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नींद
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दोस्तो, मेरा नाम अमन सिंह है, मैं राजस्थान जिले के हनुमानगढ़ जंक्शन का निवासी हूँ। मैं साधारण सा दिखने वाला बन्दा हूँ.. मेरी बॉडी बिल्कुल फिट है, मेरे लण्ड का साइज़ भी ओके है।

यह कहानी मेरी और मेरे ताऊ जी के लड़के की पत्नी यानि मेरी भाभी की है जो अब हमारे ही शहर में हमारे घर से 2 किलोमीटर दूर रहते हैं।

बात आज से दो साल पहले की है.. जब मैं 12वीं के पेपर दे कर फ्री हो गया था। तब मेरे ताऊ के लड़के यानि मेरे भईया ने अपना बिज़नेस चेंज किया और उसके लिए उन्होंने गाँव से आकर हमारे शहर में घर ले लिया। उन्हें अपने व्यापार में दूसरे शहरों में जाकर माल लाना पड़ता था.. जिस वजह से मेरी भाभी घर पर अकेली रह जाती थीं।

भाभी हफ्ते में एक-दो बार हमारे घर पर जरूर आती थीं, देवर होने के नाते उनके साथ मेरा हँसी-मजाक चलता रहता था।
मेरी भाभी काफी सेक्सी और खूबसूरत हैं। वैसे भी भाभी चाहे जैसी भी हो.. देवर हमेशा उसको चोदने के सपने देखता है। (more…)

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मैं अब आगे की कहानी सुना रहा हूँ, यह भी आपको जरूर पसंद आएगी।

मैं 21 साल का था.. तब शहर के एक कॉलेज में बीए द्वित्तीय वर्ष में पढ़ाई कर रहा था। मेरा गाँव शहर से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर है। इसलिए मैं पढ़ने के लिए बस से जाता-आता था।

एक दिन मैं कॉलेज के दोस्तों के साथ मूवी देखने लिए गया था.. इस कारण मुझे शाम को ज्यादा देर हो गई, बस स्टॉप पर बस का इन्तजार कर रहा था परन्तु किन्हीं कारणों से बस नहीं आई।

मेरे गाँव जाने वाले बहुत सारे लोग थे.. कुछ पहचान के भी थे.. उसी में एक नई अपरिचित सी लड़की भी खड़ी थी। उसे देखकर ऐसा लगा कि वो मेरे ही गाँव के किसी की मेहमान थी।

क्या गजब थी.. उसे देखकर तो बार-बार देखने को दिल कर रहा था।
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